डिजिटल डेस्क
नई दिल्ली। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि सामने आई है। अब पेट और आंतों की जांच के लिए मरीजों को दर्दनाक एंडोस्कोपी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी विशेष माइक्रोडिवाइस (गोलीनुमा उपकरण) विकसित की है, जिससे केवल एक गोली निगलकर एंडोस्कोपी जैसी जांच संभव हो सकेगी।
अब तक एंडोस्कोपी जांच के दौरान मरीज के पेट में मुंह के रास्ते एक लंबा तारनुमा उपकरण डाला जाता था, जिससे मरीज को काफी असुविधा, घबराहट और दर्द का सामना करना पड़ता था। लेकिन इस नई तकनीक के आने से यह प्रक्रिया पूरी तरह बदलने वाली है।
कैसे काम करती है यह ‘स्मार्ट गोली’
आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित यह डिवाइस चावल के दाने से भी छोटी बताई जा रही है। मरीज इसे सामान्य दवा की तरह निगल लेगा। यह गोली पेट में पहुंचने के बाद सुरक्षित रहती है और केवल आंत में पहुंचने पर सक्रिय होती है। वहां यह आंतों से आवश्यक जैविक सैंपल एकत्र करती है।
सैंपल लेने के बाद यह डिवाइस स्वतः बंद हो जाती है और प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए मल (स्टूल) के साथ शरीर से बाहर निकल आती है। इसके बाद डिवाइस को सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला भेजकर जांच की जाती है।
मरीजों के लिए बड़ी राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, जो एंडोस्कोपी से डरते हैं या जिनके लिए यह प्रक्रिया जोखिमभरी होती है। इससे न केवल दर्द और असहजता कम होगी, बल्कि जांच की प्रक्रिया भी आसान, सुरक्षित और किफायती बन सकेगी।
भविष्य में बड़े बदलाव की उम्मीद
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक पेट और आंतों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान में मददगार साबित हो सकती है। कैंसर, संक्रमण, सूजन और माइक्रोबायोम से जुड़ी बीमारियों की जांच अब पहले से कहीं ज्यादा सरल हो सकेगी।
आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह ‘एंडोस्कोपी गोली’ स्वास्थ्य सेवाओं में एक गेम चेंजर साबित होगी और मरीजों के अनुभव को पूरी तरह बदल देगी।









