गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में धूमधाम से मनाया राष्ट्रीय युवा दिवस
विवेकानंद ने चरित्रवान बनो और बनाओ का दिया था संदेश
संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता
हजारीबाग : गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुकुंदगंज में सोमवार को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। प्रशिक्षुओं ने स्वामी जी के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया और उनके जीवन-दर्शन से प्रेरित होकर एक आकर्षक लघु नाटिका का मंचन किया, जिसने सभी का दिल जीत लिया। मुख्य वक्ता के रूप में विवेकानंद युवा महामंडल, हजारीबाग के प्रतिनिधि एवं विवेकानंद आईटीआई के निदेशक गजानन पाठक ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने सभी को स्वदेश मंत्र का सामूहिक पाठ करवाया और स्वामी विवेकानंद के उस प्रसिद्ध उपदेश को दोहराया चरित्रवान बनो और बनाओ। पाठक ने कहा स्वामी ने चरित्र निर्माण को ही राष्ट्र निर्माण का आधार बताया था। यदि युवा चरित्रवान नहीं होंगे, तो राष्ट्र का पतन निश्चित है। युवाओं में अपार मेघाशक्ति है, उन्हें निरंतर परिवर्तन और मानवता के कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। विशिष्ट अतिथि एवं महाविद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष मनोज कुमार ने स्वामी विवेकानंद के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, विवेकानंद ने युवाओं के आत्मबल को जगाया। वे कभी किसी धर्म या कट्टरवाद में बंधे नहीं, बल्कि सभी धर्मों को समान सम्मान देने और सहिष्णुता की सीख दी। 1893 में शिकागो विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारतीय अध्यात्म, संस्कृति और विज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेकर देश के भविष्य और लक्ष्य को समझें। जयंती मनाने का असली अर्थ है आत्मावलोकन, आत्मसमीक्षा और उनके संदेशों को जीवन में उतारना। कार्यक्रम की खास बात रही प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका, जो वर्तमान संदर्भ में युवाओं की चुनौतियों और स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित थी। इसमें शिवानी कुमारी, मो. सोहेल अंसारी, नेहा कुमारी, नीमा कुमारी, सचिन कुमार, शारदा कुमारी और सानिया सदाब ने विवेकानंद पर अपने विचार साझा किए। मंच संचालन प्रशिक्षु मुस्कान कुमारी ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी को-ऑर्डिनेटर डॉ. अनुरंजन कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह कार्यक्रम महाविद्यालय में युवा ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला साबित हुआ, जो स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता को आज भी दर्शाता है।








