सोहराय पर्व के तीसरे दिन परंपरागत ढंग से कई दशकों बाद मनाया गया खूंटव माह

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संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता

दुमका : सोहराय पर्व के तीसरे दिन खूंटव माह का आयोजन परंपरागत रीति-रिवाजों एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा, सरी धर्म अखड़ा एवं दिसोम मरांग बुरु संताली आरिचलि आर लेगचर अखड़ा के संयुक्त तत्वावधान में दुमका प्रखंड के लेटो एवं धतिकबोना गांव में भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। दोनों गांवों में खूंटव मंझी बाबा के घर के सामने कुल्ही में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खूंटव के अवसर पर बैलों के सींगों में सिंदूर व तेल लगाया गया तथा उन्हें फूलों की मालाएं पहनाई गईं। मालाओं में पारंपरिक पकवान एवं रुपये भी लगाए गए। परंपरा के अनुसार कुल्ही में घर के दामाद द्वारा खूंटा गाड़ा गया। पूजा-अर्चना के पश्चात दामाद द्वारा बैल को माला पहनाकर बाहर ले जाया गया और खूंटे से बांधा गया। बाहर में भी महिलाओं द्वारा चिमोड़ा (पूजा) किया गया, इसके उपरांत दामाद सहित सभी ग्रामीणों ने मांदर की थाप पर बैल के चारों ओर चक्कर लगाते हुए पारंपरिक पैकाहा/लवड़िया नृत्य किया। इस पारंपरिक खूंटव अनुष्ठान से गांव में विशेष उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि तीनो अखड़ों के प्रयास से इन दोनों गांवों में पिछले दो वर्षों से खूंटव माह मनाने की परंपरा पुनः प्रारंभ की गई है, जबकि इससे पूर्व कई दशकों से सोहराय पर्व के दौरान यहां खूंटव का आयोजन नहीं हो रहा था। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान में सुनील टुडू, सुराय टुडू, सोम किस्कू, काहा मरांडी, मलोती हांसदा, मुनि हांसदा, रंजित टुडू, गणेश मरांडी, मकलू किस्कू, लुखी सोरेन, मिस्त्री मरांडी के साथ अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।

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