रांची, 24 दिसंबर 2025: झारखंड सरकार ने राज्य के आदिवासी समुदायों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम यानी PESA एक्ट के नियमों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025’ को स्वीकृति प्रदान की गई।
25 साल के इंतजार का अंत
केंद्र सरकार द्वारा 1996 में पारित PESA एक्ट को झारखंड में अब तक नियमावली के अभाव में पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका था। राज्य के गठन के 25 वर्ष बाद इन नियमों की मंजूरी से आदिवासी अधिकारों के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा। यह नियमावली राज्य के 13 पूर्ण और 2 आंशिक अनुसूचित जिलों (कुल 15 क्षेत्रों) में लागू होगी।
ग्राम सभाओं को मिलेंगे व्यापक अधिकार
नई नियमावली के तहत ग्राम सभाओं को निम्नलिखित प्रमुख अधिकार प्राप्त होंगे:
- लघु वन उपज, जल संसाधनों और स्थानीय बाजारों का प्रबंधन करने का अधिकार
- भूमि अधिग्रहण, खनन और विकास योजनाओं में अनिवार्य सहमति देने का अधिकार
- शराब की दुकानों के नियमन और सामुदायिक संपत्तियों की रक्षा करने का अधिकार
- परंपरागत स्वशासन को मजबूती प्रदान करने और बाहरी हस्तक्षेप के बिना गांव के विकास की योजना बनाने का अधिकार
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा, “PESA कानून को कई स्तरों पर चर्चा और विभागीय विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। आज हमने इसे झारखंड की जनता को समर्पित कर दिया है। यह विशेष रूप से अनुसूचित क्षेत्रों में बेहतर तरीके से लागू होगा और ग्राम सभाओं को सशक्त बनाएगा।”
न्यायिक दबाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट के दबाव में भी आया है, जहां PESA नियमों की देरी को आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था। कांग्रेस नेता के. राजू ने इस निर्णय को आदिवासियों के लिए बड़ा तोहफा बताया और सीएम हेमंत सोरेन व पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह को बधाई दी।
भविष्य की राह
नियमावली के लागू होने से आदिवासी क्षेत्रों में विकास अब ग्राम सभा की सहमति से होगा, जिससे स्थानीय समुदायों की आवाज मजबूत होगी। राज्य सरकार जल्द ही इसे अधिसूचित करने की तैयारी में है। इस निर्णय से जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों पर ग्राम सभाओं के निर्णायक अधिकार सुनिश्चित होंगे और आदिवासी स्वशासन को नई मजबूती मिलेगी।









