रांची, 24 दिसंबर 2025। क्रिसमस के पावन त्योहार पर झारखंड की राजधानी रांची में एकता और साम्प्रदायिक सौहार्द का अनूठा दृश्य देखने को मिला। विभिन्न ईसाई चर्चों के पुरोहितों एवं युवा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन से मुलाकात कर क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं।
धार्मिक प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल

जीईएल चर्च, एनडब्ल्यू जीईएल चर्च, सीएनआई चर्च और पेंटीकॉस्टल चर्च के प्रतिनिधियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान धार्मिक नेताओं ने त्योहार की खुशियों के साथ-साथ राज्य की विकास यात्रा पर चर्चा भी की।
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी तस्वीरों में मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन को चर्च प्रतिनिधियों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत करते देखा जा सकता है। पोस्ट में कहा गया, “मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM एवं विधायक श्रीमती @JMMKalpanaSoren से जीईएल चर्च, एनडब्ल्यू जीईएल चर्च, सीएनआई चर्च एवं पेंटीकॉस्टल चर्च के पुरोहित तथा यूथ लीडर्स ने शिष्टाचार भेंट कर क्रिसमस की बधाई दी। #MerryChristmas #JharkhandAt25”
झारखंड गठन के 25 वर्षों का संदर्भ
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब झारखंड अपने गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। राज्य सरकार इन आयोजनों को समावेशी और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने के संकल्प के साथ मना रही है।
राज्य में क्रिसमस की तैयारियाँ
झारखंड के विभिन्न हिस्सों में क्रिसमस की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। चर्चों को सजाया जा रहा है और विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने त्योहार के दौरान सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं।
सामुदायिक सद्भाव की मिसाल
राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को झारखंड की साम्प्रदायिक एकता और धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल के रूप में देख रहे हैं। झारखंड में विविध आदिवासी और अन्य समुदाय सदियों से साथ-साथ रहते आए हैं और राज्य सरकार इस सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।
पेसा नियमावली पर सराहना

इससे पहले राज्य कैबिनेट द्वारा पेसा नियमावली-2025 को मंजूरी दिए जाने पर आदिवासी समुदायों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सराहना की थी। यह नियमावली आदिवासी अधिकारों और स्वशासन को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
क्रिसमस के इस पवित्र अवसर पर पूरे झारखंड में उत्साह और आस्था का वातावरण है, जो राज्य की बहुलतावादी संस्कृति को एक बार फिर रेखांकित कर रहा है।








