✍️ सद्दाम हुसैन | जामताड़ा
फतेहपुर से सटे मसलिया थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित गुमरो पहाड़ दुमका जिले की उन प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है, जहां घने जंगल, हरियाली से ढकी वादियां और शांत वातावरण सैलानियों को स्वतः आकर्षित करता है। यह पहाड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए खास है, बल्कि अपने भीतर समृद्ध इतिहास और आस्था की गहरी छाप भी समेटे हुए है।
गुमरो पहाड़ का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशेष बताया जाता है। एक समय यहां दुश्मन के जहाजों की पहचान के लिए रडार सिस्टम लगाए जाने की चर्चा मिलती है, जो इसकी रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। पहाड़ की ऊंचाई तक कभी पक्की सड़क थी, जिस पर चारपहिया वाहन भी आसानी से जाया करते थे। समय के साथ जंगलों का विस्तार हुआ और कई रास्ते पगडंडियों में तब्दील हो गए, लेकिन आज भी पैदल यात्री सहजता से पहाड़ की चढ़ाई कर सकते हैं।
पूर्ववर्ती रघुवर सरकार में मंत्री रहे लुईस मरांडी ने गुमरो पहाड़ को ऐतिहासिक स्थल बताते हुए इसे पर्यटन स्थल का दर्जा देने की बात कही थी। वहीं दुमका विधायक ने भी इसे विकसित और सौंदर्यीकृत करने का आश्वासन दिया है। यदि ये योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो गुमरो पहाड़ संथाल परगना के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।
आस्था के दृष्टिकोण से भी गुमरो पहाड़ का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ के अवसर पर यहां मेला लगता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सर्दियों के मौसम में यह स्थान पिकनिक स्पॉट के रूप में लोगों की पहली पसंद बन जाता है। पहाड़ की चोटी से दिखने वाला हरियाली भरा दृश्य, ठंडी हवाएं और खुला आसमान हर आने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है।
चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल और शांति से भरा वातावरण गुमरो पहाड़ को अनोखी पहचान देता है। यह स्थल न केवल पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान से भी गहराई से जुड़ा है। आवश्यकता है इसे संरक्षित कर योजनाबद्ध विकास की, ताकि गुमरो पहाड़ जिले और राज्य के पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से उभर सके।









