झारखंड में बड़ी कार्रवाई, झांगुर ग्रुप प्रमुख कुख्यात रामदेव उरांव ने डाले हथियार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची: झारखंड पुलिस को नक्सल एवं अपराध विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सक्रिय कुख्यात अपराधी गिरोह “झांगुर ग्रुप” के सरगना और पांच लाख रुपये के इनामी अपराधी रामदेव उरांव ने शनिवार को अपने दो सहयोगियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त टीम के समक्ष तीनों ने हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई।

पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह रांची पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि झांगुर ग्रुप के सदस्य रांची-गुमला सीमावर्ती क्षेत्र में मौजूद हैं और आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। सूचना के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार (बेड़ो) के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर लमकाना क्षेत्र की ओर रवाना किया गया।

इसी दौरान गुमला पुलिस को भी इसी प्रकार की सूचना प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक गुमला के निर्देश पर घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह एवं पुलिस अवर निरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में एक टीम को सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा गया।

रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान तीनों अपराधियों ने स्वयं को झांगुर ग्रुप का सदस्य बताते हुए झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा व्यक्त की और औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वाले अपराधी

रामदेव उरांव (47 वर्ष)
ग्राम – देवरागानी, थाना – बिशुनपुर, जिला – गुमला

  • झांगुर ग्रुप का सरगना
  • हत्या, अपहरण, डकैती, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत 29 मामलों में आरोपी
  • झारखंड पुलिस द्वारा घोषित 5 लाख रुपये का इनामी अपराधी

प्रसाद उरांव (24 वर्ष)
ग्राम – देवरागानी, थाना – बिशुनपुर, जिला – गुमला

  • झांगुर ग्रुप का सक्रिय सदस्य

सुबास उरांव (23 वर्ष)
ग्राम – देवरागानी, थाना – बिशुनपुर, जिला – गुमला

  • झांगुर ग्रुप का सक्रिय सदस्य

हथियार और सामग्री बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस ने इनके कब्जे से कई हथियार और गोला-बारूद बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • एक स्वचालित हथियार (A56-2 571072 अंकित)
  • एक स्वचालित एसएलआर राइफल
  • 45 जिंदा कारतूस
  • दो मैगजीन

पुलिस ने बताया बड़ी उपलब्धि

पुलिस अधिकारियों ने इसे रांची और गुमला पुलिस के बेहतर समन्वय तथा झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता बताया है। वर्ष 2000 से सक्रिय रहे रामदेव उरांव के आत्मसमर्पण को क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों को सरकार की निर्धारित पुनर्वास नीति के तहत आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।

Leave a Comment

और पढ़ें