जमशेदपुर में नहीं थम रहे डूबने के हादसे, इस साल 13वीं मौत से बढ़ी चिंता

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

जमशेदपुर: जमशेदपुर में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। शनिवार को एक बार फिर खरकई नदी से एक युवक का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। बागबेड़ा थाना क्षेत्र के बड़ौदा घाट के पास नदी में मिले शव की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। मृतक की उम्र करीब 16 वर्ष बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, नदी में नहाने गए लोगों ने युवक को पानी में देखा और उसे बाहर निकालकर किनारे लाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी से बाहर निकालने तक युवक की सांस चल रही थी। उसे सीपीआर देकर बचाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही बागबेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल शव को शीतगृह में रखा गया है और पुलिस मृतक की पहचान तथा परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। युवक ने ब्लैक रंग का हाफ पैंट और टी-शर्ट पहन रखा था।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी बड़ौदा घाट के समीप खरकई नदी से एक नवजात का शव बरामद हुआ था। वहीं मानगो स्थित स्वर्णरेखा नदी से भी एक युवक का शव मिला था।

बढ़ती जा रही डूबने की घटनाएं

जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में वर्ष 2026 के दौरान डूबने के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही डूबने से 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 7 बच्चे शामिल हैं।

इस वर्ष की पहली बड़ी घटना 27 जनवरी को डोंगा घाट में हुई थी, जहां नहाने के दौरान 12 वर्षीय अंकुश कालिंदी की नदी में डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद 1 फरवरी को छोटा गोविंदपुर में पांच वर्षीय शिवम की कुएं में गिरने से जान चली गई।

अप्रैल महीने में भी कई दर्दनाक हादसे सामने आए। 9 अप्रैल को जिलिंगगोड़ा स्थित खरकई नदी में नहाने के दौरान सेंट्रल पब्लिक स्कूल के दो छात्र रौनक भारद्वाज और गुडविन थॉमस की डूबने से मौत हो गई थी। वहीं 22 अप्रैल को गंजिया बैराज में नहाने गए कदमा आंध्रा स्कूल के छात्र फहद रहमान की भी डूबने से जान चली गई।

इसके अलावा 27 मई को टेल्को के मनपिटा स्थित तालाब में छह वर्षीय वीर मुंडा की डूबने से मौत हो गई थी।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने प्रशासन और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। नदी, तालाब, बैराज और खुले कुओं में सुरक्षा उपायों की कमी के कारण हर साल कई लोगों की जान जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है।

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