राज्यसभा में चुनाव सुधार पर डॉ. प्रदीप वर्मा ने रखे अहम विचार, कहा—11 वर्षों से लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत कर रही मोदी सरकार डिजिटल डेस्कनई दिल्ली। भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने आज राज्यसभा में चुनाव सुधार पर चल रही चर्चा में भाग लिया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया।

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डॉ. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पिछले 11 वर्षों से लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा और सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार की प्रक्रिया लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है और मतदाता सूची का पुनरीक्षण उसी तरह आवश्यक है, जैसे घरों में समय-समय पर पुराने फर्नीचर या पर्दे बदले जाते हैं।

उन्होंने बताया कि 2002 और 2004 के बाद देश में गहन मतदाता पुनरीक्षण नहीं हुआ था, इसलिए यह जरूरी हो गया था कि अपात्र और डुप्लीकेट नाम हटाए जाएं तथा योग्य मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाए। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 65 लाख नाम हटाए गए और 21 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जिसके परिणामस्वरूप 1951 के बाद सर्वाधिक 67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और किसी भी दल ने पुनर्मतदान की मांग नहीं की।

डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्तमान में 12 राज्यों में 51 करोड़ मतदाताओं के बीच मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है, जिसका एकमात्र उद्देश्य शुद्ध और निष्पक्ष मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने विभाजन के बाद देश में आए शरणार्थियों और घुसपैठ का जिक्र करते हुए कहा कि एक अनुमान के अनुसार भारत में करीब 2 करोड़ अवैध लोग रह रहे हैं, जो आंतरिक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या संतुलन के लिए गंभीर चुनौती है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि मतदान का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को है। साथ ही उन्होंने बताया कि 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने भी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन किया था और बिहार मामले में भी न्यायालय ने इसे सही ठहराया है।

डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा कि चुनाव सुधार की दिशा में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ और राजनीति के अपराधीकरण पर रोक के लिए भी मोदी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से देश की जीडीपी प्रभावित होती है, धन की बर्बादी होती है और शिक्षकों को चुनाव कार्य में लगाने से शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ता है। एक साथ चुनाव होने से देश की जीडीपी में करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का योगदान बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए मोदी सरकार ने कानून बनाकर गंभीर आरोप में गिरफ्तारी के 30 दिनों के भीतर जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे का प्रावधान किया है।

डॉ. वर्मा ने कहा कि जो भी लोकतंत्र में विश्वास करता है, वह चुनाव सुधार प्रक्रिया का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तो विपक्षी गठबंधन के दल भी चुनाव सुधार का समर्थन करने लगे हैं और ईवीएम को लेकर भ्रम फैलाने की राजनीति समाप्त हो रही है, क्योंकि चुनाव परिणाम अब अधिक शीघ्र और पारदर्शी हो चुके हैं।

चर्चा के दौरान उन्होंने मतदाता सूची में मोबाइल नंबर जोड़ने का सुझाव भी दिया, जिससे मतदाताओं को सूचना समय पर मिलेगी और मतदान प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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