संथाल हुल एक्सप्रेस डेस्क
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन के साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति सामने आई है। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रबंध निदेशक दिमित्री बकानोव के अनुसार भारत और रूस के बीच जल्द ही सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन RD-191 को लेकर समझौता होने जा रहा है। यह तकनीकी सहयोग भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नई मजबूती प्रदान करेगा।
जानकारी के मुताबिक इस डील के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सबसे शक्तिशाली लिफ्ट रॉकेट LVM-3 को और क्षमता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से मिलने वाले इंजन के साथ भारत अंतरिक्ष मिशनों में अधिक पेलोड ले जाने एवं गहरे अंतरिक्ष अभियानों को मजबूती से संचालित करने में सक्षम हो सकता है। यह करार भारत की भविष्य की चंद्र, ग्रह और वाणिज्यिक लॉन्च क्षमताओं को भी कई गुना बढ़ाएगा।
पुतिन के दौरे के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्र में विविध समझौतों की चर्चा जारी है। यदि यह करार अंतिम रूप ले लेता है, तो यह भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जिससे वैश्विक मंच पर देश की तकनीकी साख और मजबूत होगी।









