राज्य सचिवालय के गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा सबसे ज़्यादा हो रही है—कोषागार की लाल बत्ती। यह सिर्फ़ एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक स्थिति की नाज़ुक तस्वीर को बयान कर रहा है। वित्त विभाग में काम करने वाले अधिकारी चुपचाप फुसफुसाते हैं कि “सर्वर डाउन नहीं हो रहा, उसे डाउन किया जा रहा है।” वजह साफ है—कोषागार का चेस्ट कई दिनों से खतरनाक रूप से खाली हो जा रहा है।
तकनीक का सहारा, लेकिन मजबूरी में
आधुनिक सिस्टम ने सरकारी कामकाज को तेज़ जरूर किया है, लेकिन जब कोषागार में पैसे की कमी हो जाती है तो सबसे पहले तकनीक ही ढाल बनती है। इंटीग्रेटेड फंड मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के बहाने सर्वर को बंद करना अब एक आम प्रशासनिक रणनीति बनती जा रही है।
16 और 17 नवंबर 2025 को भी ऐसा ही हुआ।
सरकार ने घोषणा की कि “वार्षिक रखरखाव और सिस्टम अपग्रेडेशन” के कारण दो दिनों तक कोषागार भुगतान नहीं करेगा। लेकिन अंदरखाने की कहानी कुछ और थी—सरकार के चेस्ट में पैसे इतनी कम मात्रा में रह गए थे कि बड़ा भुगतान आते ही ‘लाल बत्ती’ जलने का खतरा था।
भुगतान ठप, पेंशन तक रुकी
इन दो दिनों में:
बिल पास करने की प्रक्रिया रुक गई
ठेकेदारों को भुगतान नहीं हुआ
कई विभागों की योजनाएँ अटक गईं
और सबसे गंभीर—पेंशन का भुगतान भी रोक दिया गया
विभागीय सूत्र बताते हैं कि यदि उन दिनों कोई बड़ा बिल ट्रेजरी पहुँच जाता तो सरकार के चेस्ट का बैलेंस शून्य के करीब पहुँच सकता था, जिससे स्थिति बेहद शर्मनाक हो जाती।
जब RBI से आने लगा ताज़ा अलर्ट
सरकार RBI से लगातार रियल-टाइम अपडेट ले रही थी।
सचिवालय सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग को हर कुछ घंटों में चेस्ट की स्थिति की निगरानी करनी पड़ी। शीर्ष स्तर पर चिंता इतनी बढ़ी कि किसी भी बड़े भुगतान को रोकने की चुप्पी-सहमति बना दी गई।
जब विभिन्न मदों से राजस्व और केंद्र से धन आवंटन आया, तब जाकर 48 घंटे बाद भुगतान फिर से शुरू किया जा सका।
सरकार अभी भी सामान्य स्थिति में नहीं
सूत्रों का कहना है कि जैसे-तैसे सर्वर बहाल जरूर हो गया है, लेकिन:
चेस्ट का बैलेंस अभी भी नाजुक
बड़ी योजनाओं के भुगतान में देरी
विभागों के बीच असहजता
और मुख्यमंत्री सचिवालय तक चिंता का माहौल
सरकार को इस डर का भी सामना करना पड़ रहा है कि अगर ‘लाल बत्ती’ की खबर सार्वजनिक हो गई तो प्रशासन की छवि पर गहरा असर पड़ेगा।
राजस्व बढ़ाने पर तेज़ मंथन
वित्त विभाग अब पूरी ताकत से इस सवाल पर विचार कर रहा है—
“राजस्व बढ़ाया कैसे जाए?”
इसके लिए कई प्रस्तावों पर मंथन जारी है—
टैक्स कलेक्शन में सुधार
बकाया वसूली की विशेष मुहिम
गैर-जरूरी योजनाओं पर रोक
एक्साइज और माइनिंग से अधिक राजस्व
बड़े विभागों के बजट का पुनर्गठन
सूत्र बताते हैं कि आने वाले हफ्तों में कुछ सख्त फैसले भी लिए जा सकते हैं।
निचोड़
सचिवालय में सर्वर बंद होने की वजह सिर्फ़ तकनीकी रखरखाव नहीं थी, बल्कि यह राज्य की कमजोर आर्थिक सेहत का एक अलार्म था। सरकार इसे संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन कोषागार की लाल बत्ती का संकेत बता रहा है कि स्थिति अभी भी संवेदनशील है।
राज्य के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या सरकार समय रहते वित्तीय स्थिरता बहाल कर पाएगी?
संथाल हूल एक्सप्रेस आगे भी इस मुद्दे पर नज़र बनाए रखेगा।









