संथाल हूल एक्सप्रेस डेक्स
नई दिल्ली। ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने एक अहम और संतुलित फैसला लिया है। आयोग ने ईवीएम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत करने के लिए एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी किया है, जिसके तहत अब चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कम से कम 5% ईवीएम मशीनों के माइक्रोकंट्रोलर और बर्न्ट मेमोरी का अनिवार्य सत्यापन किया जाएगा।
आयोग ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
ईसीआई ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल @ECISVEEP पर इस नई प्रक्रिया की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “ईवीएम माइक्रोकंट्रोलर सत्यापन के लिए तकनीकी-प्रशासनिक एसओपी: परिणाम के बाद आवेदन मिलने पर 5% ईवीएम की बर्न्ट मेमोरी/माइक्रोकंट्रोलर का अनिवार्य सत्यापन।” आयोग ने अधिक जानकारी के लिए अपनी वेबसाइट का लिंक भी दिया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: ‘कदम सही, लेकिन अपर्याप्त’
हालांकि इस कदम को पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे ‘नाकाफी’ बताते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा, “5% सत्यापन एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह जनता के सभी सवालों का जवाब नहीं है। यदि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो आयोग को 100% सत्यापन से क्या आपत्ति हो सकती है? हम VVPAT की 100% गिनती की मांग दोहराते हैं।”
इसी तरह, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “आयोग का कदम अच्छा है, लेकिन यह लोकतंत्र में जनता के विश्वास को पूरी तरह स्थापित नहीं करता। जब तक हर VVPAT स्लिप की मैचिंग नहीं होती, तब तक संदेह बना रहेगा।”
सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। एक ओर जहाँ कई यूजर्स ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बताया, वहीं कुछ ने सवाल उठाए।
· सराहना: एक यूजर ने लिखा, “बिहार चुनाव में बिना हिंसा के मतदान और शून्य पुनर्मतदान—उत्कृष्ट कार्य! यह नया कदम और भी विश्वास जगाता है।”
· आलोचना: दूसरी ओर, एक यूजर का सवाल था, “5% ही क्यों, सब क्यों नहीं?” जबकि एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया, “वोट डालने से पहले मोबाइल पर ओटीपी आना चाहिए ताकि वोट चोरी पर लगाम लगे।”
विशेषज्ञों का नजरिया: ‘संतुलित और व्यावहारिक कदम’
चुनावी प्रक्रियाओ के जानकार मानते हैं कि यह एक संतुलित फैसला है। “सुप्रीम कोर्ट द्वारा VVPAT की महत्ता को रेखांकित करने के बाद, यह आयोग की ओर से एक सार्थक पहल है,” दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने बताया। “5% का आंकड़ा सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण है और यह एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है, जो आयोग के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाले बिना निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। हालाँकि, विपक्ष की चिंताओं को भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
निर्वाचन आयोग का यह निर्णय ईवीएम पर बढ़ते राजनीतिक विवाद को कम करने और तकनीकी पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, 5% सत्यापन और 100% सत्यापन की मांग के बीच का यह अंतर अगले चुनावी मौसम में एक प्रमुख बहस का विषय बना रहने की संभावना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह नया प्रोटोकॉल सभी हितधारकों का विश्वास हासिल कर पाता है।









