ऐतिहासिक श्रम सुधार: देश में एक साथ लागू हुए चारों लेबर कोड

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा मजदूरों के सशक्तिकरण और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की ओर अहम कदम’

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश के श्रम ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए चारों लेबर कोड तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए। इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसे भारत के श्रमिकों के सशक्तिकरण और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम बताया। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया द्वारा जारी अधिसूचना के बाद ये कोड अब पूरे देश में लागू हो गए हैं। इसके साथ ही दशकों पुराने 29 श्रम कानून समाप्त हो गए हैं और देश का श्रमिक कल्याण एवं औद्योगिक विनियमन का पूरा परिदृश्य बदल गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पूर्व में ट्विटर पर जताई प्रतिक्रिया

इस बड़े सुधार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा चारों लेबर कोड का लागू होना भारत के श्रमिकों के सशक्तिकरण और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम है। यह सुधार हमारे मजदूर भाई-बहनों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन देते हुए उद्योगों के लिए एक सरल और पारदर्शी वातावरण तैयार करेगा। यह कोड आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होंगे। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया गया है और अब वे देश के कानून हैं। यह कोड आत्मनिर्भर भारत के लिए श्रम सुधारों को आगे बढ़ाएंगे। श्रम नियमों का यह आधुनिकीकरण, श्रमिकों के कल्याण को बढ़ावा देगा और श्रम पारिस्थितिकी तंत्र को कार्य की उभरती दुनिया के साथ संरेखित करेगा।”

कौन-से हैं ये चार कोड?

लागू किए गए चार कोड और उनके मुख्य फोकस क्षेत्र इस प्रकार हैं:

  1. वेज कोड, 2019 (वेतन संहिता): यह संहिता वेतन भुगतान, बोनस और मजदूरी से जुड़े सभी नियमों को एक जगह लाती है। इसमें सभी श्रमिकों के लिए समय पर वेतन का प्रावधान है।
  2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 (औद्योगिक संबंध संहिता): यह संहिता हायर एंड फायर, शिकायत निवारण और ट्रेड यूनियनों से जुड़े नियमों को सरल बनाती है। इसमें ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट’ का प्रावधान शामिल है, जो उद्योगों को मौसमी या निश्चित अवधि के लिए श्रमिक रखने में लचीलापन देगा।
  3. सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 (सामाजिक सुरक्षा संहिता): यह कोड सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाता है। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे ओला-उबर ड्राइवर) और मजदूर भी पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं के दायरे में आ सकेंगे।
  4. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेलTH एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता): यह संहिता कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम के बेहतर माहौल से जुड़े मानकों को परिभाषित करती है। इसमें महिला श्रमिकों के लिए रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति जैसे प्रगतिशील प्रावधान शामिल हैं।

क्यों जरूरी थे ये नए कोड?

· पुराने और जटिल कानून: भारत के अधिकांश श्रम कानून स्वतंत्रता से पहले और उसके तुरंत बाद (1930-1950 के दशक) के बने थे, जो आज की डिजिटल और गतिशील अर्थव्यवस्था के अनुकूल नहीं थे।
· कानूनों का बिखराव: अब तक देश 29 केंद्रीय और 100 से अधिक राज्य-स्तरीय श्रम कानूनों के जटिल जाल में उलझा हुआ था, जिससे उद्योगों के लिए अनुपालन बेहद मुश्किल था।
· ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा: नए कोड व्यवसाय शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को सरल बनाकर देश में निवेश को आकर्षित करने में मदद करेंगे। अब कंपनियों को कम लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ेगी।
· श्रमिकों का व्यापक कल्याण: नए कोड सभी श्रमिकों, खासकर असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों, को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करते हैं।

उद्योग जगत और श्रमिक संगठनों की क्या है प्रतिक्रिया?

· उद्योग जगत का स्वागत: एफआईसीसीआई ,सीआईआई और एएसएसओसीएचएएम जैसे उद्योग संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, औपचारिककरण बढ़ेगा और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी।

ट्रेड यूनियनों की चिंताएं

कुछ श्रमिक संगठनों ने इसमें चिंता जताई है कि नए कोड से ‘हायर एंड फायर’ की नीति को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर होगी। हालांकि, सरकार का दावा है कि नए कोड में श्रमिक हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के एक्स ने इस सुधार को राष्ट्रीय एजेंडे में और मजबूती से स्थापित कर दिया है। इन चार श्रम संहिताओं का लागू होना भारत के श्रम बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर है। इससे न सिर्फ व्यवसायों को सरल नियमों का लाभ मिलेगा, बल्कि देश के करोड़ों श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा, जो एक आधुनिक और न्यायसंगत कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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