नेतरहाट में जंगल वॉरफेयर स्कूल के रक्तदान शिविर में 240 यूनिट रक्त संग्रहित, राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नेतरहाट। झारखंड राज्य के गठन के 25वें वर्षगांठ के अवसर पर चल रहे राज्यव्यापी स्वैच्छिक रक्तदान अभियान के तहत आज जंगल वॉरफेयर स्कूल (जेडब्ल्यूएफएस), नेतरहाट कैंपस में एक सफल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में प्रशिक्षुओं, अधिकारीयों और कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 240 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। यह अभियान न केवल रक्त की कमी को दूर करने का प्रयास है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानवता की सेवा को बढ़ावा देने का भी माध्यम साबित हो रहा है। शिविर का शुभारंभ और संचालन श्री धनंजय कुमार सिंह, पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआईजी), जेडब्ल्यूएफएस नेतरहाट के नेतृत्व में किया गया। सिंह ने व्यक्तिगत रूप से रक्तदान किया और सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में स्पेशलिस्ट लॉ एक्जीक्यूटिव (एसएलसी) प्रशिक्षुओं, जेडब्ल्यूएफएस के पदाधिकारियों, सेंट्रल इंटरमीडिएट एक्जीक्यूटिव ट्रेनिंग (सीआईएटी) के सदस्यों तथा इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी)-4 के कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। चिकित्सा टीम ने पूर्ण सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए रक्त संग्रह प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया, जिसमें डोनर्स के स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर पोस्ट-डोनेशन देखभाल तक सभी प्रोटोकॉल शामिल थे। शिविर के दौरान डोनर्स को बेड पर लेटाकर आरामदायक वातावरण प्रदान किया गया, जबकि मेडिकल स्टाफ ने प्रत्येक चरण पर निगरानी रखी। आयोजन के अंत में प्रतिभागियों को माला पहनाकर सम्मानित किया गया, जो इस पहल की प्रेरणादायी माहौल को दर्शाता है। यह घटना न केवल पुलिस विभाग की सामाजिक प्रतिबद्धता को उजागर करती है, बल्कि राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है।

यह शिविर झारखंड सरकार द्वारा 12 नवंबर से 28 नवंबर 2025 तक चलाए जा रहे राज्यस्तरीय रक्तदान अभियान का अभिन्न अंग है। अभियान की शुरुआत 12 नवंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रांची के प्रोजेक्ट भवन में रक्तदान कर की गई थी। सोरेन ने इस अवसर पर कहा था, “यह मानवता का महादान है। मैं अपील करता हूं कि सभी लोग इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।” अभियान का उद्देश्य राज्य भर में रक्त भंडार को बढ़ाना है, खासकर मौसमी मांगों और हालिया घटनाओं के मद्देनजर। पृष्ठभूमि में, चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना ने रक्त बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इस घटना के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की और स्वास्थ्य विभाग ने रक्त बैंकों के लिए सख्त ऑडिट और एलिसा टेस्ट सिस्टम की अनिवार्य स्थापना का आदेश दिया। राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर नेहा अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि रक्तदान को सामूहिक आंदोलन बनाया जाए। इसके अलावा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य रक्त ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) की बैठक में राष्ट्रीय रक्त नीति-2002 के अनुपालन पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी अभियान को समर्थन देते हुए जागरूकता फैलाने पर बल दिया। अभियान के तहत अब तक रांची कलेक्टरेट में 26 यूनिट रक्त संग्रहित हो चुका है, जबकि गढ़वा जिले में 12 से 28 नवंबर तक कई कैंप आयोजित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल रक्त विक्रेताओं पर निर्भरता कम कर स्वैच्छिक दान को प्रोत्साहित करेगी, जो रक्त सुरक्षा के लिए आवश्यक है। पीपुल्स हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (इंडिया) जैसे संगठनों ने भी केंद्र सरकार से रक्त व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। झारखंड पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल @JharkhandPolice ने इस शिविर की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (@HemantSorenJMM), पूर्व डीजीपी तड़ाशा मिश्रा (@Tadashamishra_) और जेडब्ल्यूएफएस नेतरहाट (@JwfsNetarhat) को टैग किया, जो अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। यह घटना राज्य के पुलिसकर्मियों की सामाजिक सेवा भावना को रेखांकित करती है, जो न केवल कानून व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता में भी योगदान दे रही है। अधिक जानकारी के लिए झारखंड स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट या स्थानीय रक्त बैंक से संपर्क करें। यह अभियान 28 नवंबर तक जारी रहेगा, और सभी योग्य नागरिकों से अपील है कि वे इसमें भाग लें।

Leave a Comment

और पढ़ें