पटना/नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा व्यक्त की है। उनके इस वक्तव्य के बाद राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल तेज हो गई है और संभावित राजनीतिक परिवर्तन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों का भी सदस्य बनें। इसी क्रम में इस बार होने वाले चुनाव में वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की जनता द्वारा दिए गए समर्थन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता से उनका संबंध आगे भी बना रहेगा और वे राज्य के विकास के लिए निरंतर मार्गदर्शन देते रहेंगे। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री 6 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। नामांकन के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई प्रमुख नेताओं के उपस्थित रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य बनते हैं, तो उनके मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में लगभग दो दशकों बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

इधर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर भी संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा चल रही है। कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाया जा सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि बिहार से अप्रैल माह में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव प्रस्तावित हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन इन सभी सीटों पर विजय प्राप्त करने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह घोषणा राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।







