संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर अमेरिका की एक रिपोर्ट ने देश की सियासत में नई तकरार पैदा कर दी है। अमेरिकी इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमिशन (USCC) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत से हुए संघर्ष में पाकिस्तान को सैन्य बढ़त हासिल हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पहलगाम हमले को आतंकवादी हमला न मानकर इसे ‘विद्रोही हमला’ करार दिया गया। रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को भारत की कूटनीतिक छवि के लिए “गंभीर झटका” बताते हुए सरकार से स्पष्ट प्रतिक्रिया की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि रिपोर्ट में किए गए दावे भारत की सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी स्थिति पर सवाल उठाते हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री इस रिपोर्ट पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराएंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध जताएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस आयोग की रिपोर्ट अक्सर भू-राजनीतिक विश्लेषणों पर आधारित होती है, लेकिन इसे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। भारत की आधिकारिक नीति हमेशा पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में उजागर करने की रही है, और पहलगाम जैसे हमलों को भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का नतीजा बताता आया है।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय के भीतर भी इसकी समीक्षा की चर्चा है। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अमेरिकी पक्ष के साथ राजनयिक माध्यमों से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर लगातार कड़े तेवर अपनाता रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर जनसभाओं तक चर्चा में रहेगा और भारत की विदेश नीति पर भी इसका व्यापक असर देखा जा सकता है।









