IND-PAK संघर्ष के बाद चीन ने राफेल के खिलाफ चलाया दुष्प्रचार अभियान

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और विश्लेषकों की रिपोर्टों ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद चीन ने फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान राफेल के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान चलाया। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर राफेल की छवि को कमजोर करना और संभावित हथियार खरीदार देशों को प्रभावित करना था।

अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग की एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने इस अभियान को संचालित करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल किया। इन अकाउंट्स के माध्यम से AI जनरेटेड फोटो, वीडियो और युद्ध-गेम्स के फर्जी फुटेज पोस्ट किए गए। इन सामग्रियों में दिखाया गया कि चीन का J-35 फाइटर जेट हवा में राफेल को मार गिरा रहा है, जबकि ऐसा कोई वास्तविक सैन्य संघर्ष कभी हुआ ही नहीं था। दुष्प्रचार सामग्री को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो यह किसी वास्तविक सैन्य अभियान का हिस्सा हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस प्रकार की ऑनलाइन रणनीतियों का उपयोग अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और प्रतिद्वंद्वी देशों के हथियारों को कमतर ठहराने के लिए करता रहा है। रक्षा बाजार में राफेल की बढ़ती लोकप्रियता चीन के लिए चिंता का विषय रही है, क्योंकि कई देश J-35 सहित चीनी लड़ाकू विमानों और राफेल के बीच तुलना कर रहे हैं। इसी वजह से चीन का उद्देश्य वैश्विक खरीदारों की धारणा बदलना था।

भारत के रक्षा विश्लेषकों ने इसे सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि यह घटना दिखाती है कि भविष्य का युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लड़ा जाएगा। हालांकि फ्रांस और भारत ने इस अभियान को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि राफेल की वास्तविक प्रदर्शन क्षमता और उसकी सिद्ध विश्वसनीयता पर ऐसे फर्जी दावों का कोई असर नहीं पड़ेगा।

मामले के सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर डिजिटल प्रोपेगैंडा किस तरह प्रभाव डाल रहा है और बड़े देश इसे हथियार के रूप में कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं।

Leave a Comment

और पढ़ें