जमशेदपुर। गोपाल मैदान में आयोजित तीन दिवसीय ‘संवाद-2025’ कार्यक्रम का बुधवार को भव्य समापन हो गया। इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन ने 572 आवेदनों में से 9 प्रतिभागियों को संवाद फेलोशिप 2025 के लिए चयनित किया।
विविध विषयों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित सत्रों में आदिवासी समुदायों की परंपराओं, ज्ञान प्रणालियों और समकालीन चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कला एवं हस्तशिल्प सत्र में डिजाइन और नवाचार की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि आदिवासी उपचार पद्धतियों पर केंद्रित सत्र में पारंपरिक ज्ञान की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला गया।
25 राज्यों से आए थे आवेदन
फेलोशिप के लिए 25 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 122 जनजातियों के प्रतिनिधियों ने आवेदन किया था। इनमें विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के 10 आवेदक भी शामिल थे।
प्रतिष्ठित जूरी ने किया चयन
चयन प्रक्रिया डॉ. सोनम वांगचुक, मीनाक्षी मुंडा, ओइनम डोरेन, परमानंद पटेल और मदन मीणा की जूरी द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने बताया कि यह फेलोशिप 2017 से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक प्रथाओं के संरक्षण के लिए कार्यरत है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समापन समारोह में मुंडा, कूकी, गारो और कंधा जनजातियों की पारंपरिक नृत्य एवं संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गरिमा एक्का और अर्जुन लकड़ा की विशेष प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया।
हस्तशिल्प और व्यंजनों की भारी मांग
कार्यक्रम स्थल पर लगे आदिवासी व्यंजनों के स्टॉल पर लोगों की भीड़ उमड़ी रही। साथ ही पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और औषधीय उत्पादों के स्टॉल ने भी visitors का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
यह कार्यक्रम एक बार फिर आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत और उसके सतत विकास की संभावनाओं को रेखांकित करने में सफल रहा।









