संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
बांग्लादेश में हिंसा का दौर लगातार चौथे दिन भी जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में आगजनी, उपद्रव, विस्फोटक हमले और पथराव की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। स्थिति इस कदर बिगड़ गई है कि सरकार ने राजधानी ढाका समेत कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस को ‘देखते ही गोली मारने’ का आदेश जारी कर दिया है।
ढाका में सोमवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके दौरान उपद्रवियों ने दो बसों में आग लगा दी। सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया, लेकिन उग्र भीड़ कई इलाकों में पुलिस और सेना के प्रयासों को चुनौती देती रही।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के फैसले की घोषणा से पहले ही पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद उपद्रवी समूहों ने कई शहरों में हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने सरकारी दफ्तरों और वाहनों को निशाना बनाया, जबकि पुलिस को कई बार बैकअप फोर्स बुलानी पड़ी।
बांग्लादेश में हालात पर काबू पाने के लिए सेना की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कुछ क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सुरक्षा बल उपद्रवियों को रोकने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता की नाराजगी को कुचलने के लिए कठोर कदम उठा रही है और कोर्ट के फैसले के बाद से हालात बदतर होते जा रहे हैं।
बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा है। नागरिकों से घरों में रहने की अपील की गई है, जबकि प्रशासन ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है, क्योंकि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है।









