जनजातीय गौरव दिवस: पीएम मोदी ने आदिवासी उत्थान के लिए घोषित की कई योजनाएं

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गुजरात । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज के जीवन स्तर में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की। एक वीडियो संदेश के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए उन्होंने आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में चल रही विभिन्न पहलों की जानकारी दी।

आर्थिक सशक्तिकरण के उपाय

प्रधानमंत्री ने बताया कि वन उत्पादों की संख्या में लगभग 100 की वृद्धि की गई है और इनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा, “श्री अन्न योजना के तहत आदिवासी भाई-बहनों को अधिक खाद्य और अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय के किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।”

स्वास्थ्य क्षेत्र में पहल

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारी से निपटने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि अब तक 6 करोड़ आदिवासियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में डिस्पेंसरी, मेडिकल सेंटर और अस्पतालों का नेटवर्क भी विस्तारित किया गया है।

शिक्षा में स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा की सुविधा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भाषा की बाधा के कारण पिछड़ रहे आदिवासी बच्चों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

संस्कृति संरक्षण का वादा

मोदी ने आदिवासी कला और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा, “आदिवासी समुदाय की कला हमारे देश की अमूल्य धरोहर है।” उन्होंने एक आदिवासी कलाकार को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का उल्लेख किया।

भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के परिवारजनों का अभिनंदन किया और कहा कि आदिवासी समाज की स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

जनता की प्रतिक्रिया

इन घोषणाओं पर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहाँ एक ओर कई लोगों ने इन पहलों की सराहना की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि ये नीतियाँ जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं।

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