75 वर्ष के सिद्धांत को लेकर भाजपा पर सवाल, असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

डेस्क

रांची। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने भाजपा पर S.I.R और ‘वन्दे मातरम्’ जैसे मुद्दों को बार-बार उछालकर जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि असल मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वयं घोषित 75 वर्ष के आयु-सिद्धांत को लेकर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाना है।

विजय शंकर नायक ने कहा कि 75 वर्ष का सिद्धांत कोई विपक्षी आरोप नहीं, बल्कि स्वयं भाजपा नेतृत्व द्वारा सार्वजनिक रूप से घोषित और अपनाया गया राजनीतिक मानदंड रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात कही थी कि भाजपा में 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद नेताओं को सक्रिय राजनीति और पदों से हटकर मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसी सिद्धांत के तहत भाजपा के कई वरिष्ठ और संस्थापक नेताओं—लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, शांता कुमार और सुमित्रा महाजन—को सक्रिय राजनीति से बाहर कर दिया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि 75 वर्ष का सिद्धांत केवल कथन नहीं, बल्कि व्यवहार में लागू किया गया नियम रहा है।

विजय शंकर नायक ने सवाल उठाया कि जो सिद्धांत अन्य वरिष्ठ नेताओं पर लागू हुआ, वही प्रधानमंत्री पर क्यों लागू नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ है और 17 सितंबर 2025 को वे 75 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं। ऐसे में यह सिद्धांत अब भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान की कसौटी बन चुका है।

उन्होंने कहा कि यदि 75 वर्ष का नियम वास्तव में राजनीतिक नैतिकता और संगठनात्मक लोकतंत्र का आधार है, तो उसका पालन सबसे पहले शीर्ष नेतृत्व द्वारा होना चाहिए। लोकतंत्र में नेता से बड़ा उसका वचन होता है और यदि घोषित सिद्धांतों का पालन नहीं किया जाता, तो जनता का विश्वास राजनीति से उठने लगता है।

विजय शंकर नायक ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि राजनीतिक नैतिकता, सार्वजनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक परंपराओं के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि क्या 75 वर्ष का सिद्धांत केवल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के लिए था या प्रधानमंत्री पर भी समान रूप से लागू होगा।

Leave a Comment

और पढ़ें