संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
लाहौर। विभाजन के बाद पहली बार पाकिस्तान के किसी विश्वविद्यालय में प्राचीन भाषा संस्कृत को पढ़ाने की औपचारिक शुरुआत हुई है। यह ऐतिहासिक पहल लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एलयूएमएस) द्वारा की गई है, जिसे शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
एलयूएमएस द्वारा शुरू किए गए इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत संस्कृत भाषा के साथ-साथ भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रमुख ग्रंथों—महाभारत और भगवद गीता—का भी अध्ययन कराया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस कोर्स का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राचीन भाषाओं, दर्शन और सभ्यतागत इतिहास की गहरी समझ प्रदान करना है।
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया की साझा सांस्कृतिक धरोहर को समझने और संवाद को बढ़ावा देने में सहायक होगा। साथ ही, यह पहल यह भी दर्शाती है कि आधुनिक शिक्षा संस्थान अब परंपरा और आधुनिकता के संतुलन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
पाठ्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसे न केवल भाषाई अध्ययन के विस्तार के रूप में, बल्कि सांस्कृतिक सेतु निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।









