झारखंड विधानसभा ने लोक भवन का नाम बदलने के प्रस्ताव को रखा, बिरसा भवन और सिदो-कान्हू भवन बनने की राह पर

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संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में किया प्रस्ताव पेश, राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का उद्देश्य

रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज एक ऐतिहासिक प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा गया। संसदीय कार्य मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर ने राजधानी रांची स्थित ‘लोक भवन’ का नाम बदलकर ‘बिरसा भवन’ और दुमका स्थित लोक भवन का नाम ‘सिदो-कान्हू भवन’ किए जाने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया।

प्रस्ताव रखते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य भवन राज्य सरकार की संपत्ति है और इसका नामकरण करने का अधिकार भी राज्य के पास है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 154 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है और राज्यपाल का पद एक राज्य पद है। राज्यपाल के कार्यालय से विधायी कार्यों का निर्वहन किया जाता है, जिसमें विधानसभा से पारित विधेयकों को अनुमति देना आदि शामिल है।

प्रस्ताव का महत्व:
यह प्रस्ताव राज्य केस्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और जननायकों के योगदान को स्थायी रूप से सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडा झारखंड के एक लोकनायक और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे, जबकि सिदो और कान्हू मुर्मू 1857 के संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी नेता थे।

आगे की प्रक्रिया:
प्रस्ताव पर सदन मेंचर्चा होनी है और उसके पश्चात मतदान द्वारा इसे पारित किया जाएगा। प्रस्ताव के पारित होने के बाद राज्य सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगी और भवनों के नाम बदले जाएंगे।

प्रतिक्रियाएं:
सत्तारूढ़दल के सदस्यों ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और राज्य की जनभावनाओं के अनुरूप बताया है। विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है। माना जा रहा है कि यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला साबित होगा।

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