अयोध्या विवाद की 33वीं बरसी पर इतिहास फिर यादों में ताज़ा|संथाल हुल एक्सप्रेस डेस्क

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6 दिसंबर 1992 का दिन भारतीय इतिहास में एक संवेदनशील अध्याय के रूप में दर्ज है। आज बाबरी ढांचा विध्वंस की 33वीं बरसी है, जब अयोध्या में स्थित 16वीं सदी में निर्मित विवादित ढांचे को बड़ी संख्या में एकत्रित कारसेवकों की भीड़ द्वारा ढहा दिया गया था। घटना के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा और स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

यह मामला वर्षों तक न्यायालयों में चला और 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए विवाद को समाप्त घोषित किया। अदालत ने अपने निर्णय में जनभावनाओं, ऐतिहासिक साक्ष्यों और विधिक तथ्यों को आधार बनाया, जिसके बाद मामला सदैव के लिए बंद समझा गया।

बरसी के इस अवसर पर देश के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है, वहीं समाज के विभिन्न तबकों द्वारा भी इतिहास से सीख लेकर आगे बढ़ने और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की बात कही जा रही है।

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