संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।
आज भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी है—वह काली रात जिसे भारतीय इतिहास की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटना माना जाता है। 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसायनाइड (MIC) का रिसाव हुआ, जो कुछ ही मिनटों में पूरी हवा में फैल गया।
इस जहरीली गैस ने हजारों लोगों की सांसें रोक दीं। देखते ही देखते शहर की सड़कों पर लाशें बिछ गईं। कई लोगों की पहचान तक नहीं हो सकी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस त्रासदी में 3928 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों आज भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
भोपाल गैस कांड मानव इतिहास की ऐसी विनाशकारी घटना थी जिसने औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदारी पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए। यह त्रासदी आज भी देश की सामूहिक स्मृति में एक गहरे घाव की तरह मौजूद है, जिसे भूल पाना संभव नहीं।









