संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।
हर साल नवंबर महीने के पहले बुधवार को राष्ट्रीय तनाव जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को तनाव के कारणों, उसके प्रभावों और उससे निपटने के तरीकों के प्रति जागरूक करना है। आधुनिक जीवनशैली में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के तनाव से जूझ रहा है—चाहे वह काम का दबाव हो, आर्थिक बोझ, संबंधों में असंतुलन या तकनीक पर बढ़ती निर्भरता।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक तनाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि यह रिश्तों, शारीरिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी गहरा असर डालता है। आज की तथाकथित ‘रोबोटिक जिंदगी’ में लोग लगातार दौड़-भाग में लगे रहते हैं, जिससे मन और शरीर पर बोझ बढ़ता जाता है।
तनाव को समय रहते पहचानना और उसे कम करने के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। योग, ध्यान, पर्याप्त नींद, समय प्रबंधन और परिवार व मित्रों के साथ संवाद—ये सभी कदम तनाव कम करने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
राष्ट्रीय तनाव जागरूकता दिवस हमें याद दिलाता है कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य, और इसे नज़रअंदाज करना जीवन में गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है।









