JPSC जाति प्रमाण पत्र घोटाला: पूर्व BDO रूपेश कुमार फिर सस्पेंड, जांच में आरोप सही पाए गए

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रांची। झारखंड प्रशासनिक सेवा (JPSC) की परीक्षा में जाति प्रमाण पत्र से जुड़े एक घोटाले में एक अधिकारी को फिर से झटका लगा है। पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चिन्मय गढ़वाल उर्फ रूपेश कुमार को एक बार फिर से निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति की जाति का नकली प्रमाण पत्र बनवाकर JPSC की चौथी परीक्षा में चयन हासिल किया था।

जांच में आरोपी पाए जाने के बाद हुई कार्रवाई

मामले की शिकायत विभाग को मिलने के बाद गहन जांच शुरू की गई। जांच में रूपेश कुमार के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए। यह पाया गया कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग-1 का एक गलत जाति प्रमाण पत्र बनवाया था और उसी का इस्तेमाल करते हुए JPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। इसी के आधार पर विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया।

हाईकोर्ट और फिर सरकार की कार्रवाई

रूपेश कुमार ने इस निलंबन आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने 15 जुलाई, 2023 को सरकार के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया था। हालांकि, बाद में राज्य सरकार ने फिर से याचिका दाखिल कर कोर्ट से विभागीय कार्रवाई जारी रखने की अनुमति मांगी और मिल गई।

पुनः जांच और निलंबन

इसके बाद एक नई जांच समिति का गठन किया गया, जिसने रूपेश कुमार और उनकी पत्नी नीतू कुमारी की आर्थिक व अन्य स्थितियों का अध्ययन किया। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि उनके पिता लंबे समय से बीमार हैं और इस आधार पर वे निलंबन अवधि से राहत चाहते थे। लेकिन जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी और नौकरी पाने के लिए गलत दस्तावेज देने के आरोप को गंभीर मानते हुए सरकार ने 5 जुलाई, 2018 के आदेश के आधार पर एक बार फिर से उन्हें निलंबित करने का फैसला किया है।

निलंबन अवधि के नियम

निलंबन की इस नई अवधि के दौरान उन्हें कमिश्नर कार्यालय, रांची में तैनात किया गया है। इस दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा। अब यह मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

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