झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘स्वाभिमानी बिरसा-2025’ का भव्य समापन, जनजातीय संस्कृति का दिखा विलक्षण रंग

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रांची। झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘स्वाभिमानी बिरसा-2025’ समारोह का समापन शनिवार को भव्यता के साथ हुआ। यह कार्यक्रम झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और विरासत को समर्पित रहा।

गणमान्य व्यक्तियों ने दी श्रद्धांजलि

समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. क्षिति भूषण दास रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात हॉकी खिलाड़ी सुमराई टेटे, चित्रकार सी.आर. हेंब्रम, विश्व ट्राइबल क्वीन-2025 पूजा लकड़ा और रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव गुरु चरण साहू मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रोफेसर निशथ उद दीन की अगुवाई में सभी अतिथियों द्वारा बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।

कुलपति ने कहा- “स्वाभिमानी वही है जो आत्मनिर्भर है”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफेसर निशथ उद दीन ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जनजातीय अस्मिता को जिस सम्मान से देखा, उसी का परिणाम है कि आज पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा, “बिरसा मुंडा स्वाभिमान से भरे हुए थे और इसी स्वाभिमान के कारण वे अंग्रेजों के सामने नहीं झुके। स्वाभिमान जिसके पास होता है, वह समझौता नहीं करता।”

मलखंभ और तीरंदाजी ने बढ़ाया समारोह का गौरव

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण झारखंड मल्लखम अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत रोप मल्लखम, हैंगिंग मल्लखंभ और पिरामिड जैसे शानदार प्रदर्शन रहे। इसी तरह, कार्तिक ओरांव आर्चरी ट्रेनिंग सेंटर के युवा तीरंदाजों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

फोटोग्राफी प्रदर्शनी और फैशन शो रहा चर्चा का केंद्र

कुलपति और अतिथियों ने ‘स्वाभिमानी बिरसा फोटोग्राफी प्रदर्शनी’ का उद्घाटन किया, जिसमें राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बीजू टोप्पो सहित छह फोटोग्राफर्स की झारखंड की जनजातीय जीवन शैली और संस्कृति को दर्शाती तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। इसके अलावा, एक विशेष फैशन शो के माध्यम से संताल, उरांव, मुंडा, गोंड सहित विभिन्न जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा का प्रदर्शन किया गया।

सांस्कृतिक नृत्यों ने बांधा समां

समारोह की शाम विभिन्न जनजातीय नृत्य प्रस्तुतियों के रंग में सराबोर रही। कलाकारों ने छऊ (पुरुलिया), संथाली नृत्य, कड़सा, पाइका और मरदानी झूमर जैसे पारंपरिक नृत्यों की अविस्मरणीय प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मिला सम्मान

इस अवसर पर ‘स्वाभिमानी बिरसा’ के प्री-इवेंट्स में आयोजित क्विज, निबंध, पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग और कविता पाठ जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को हॉकी स्टार सुमराई टेटे द्वारा पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान की एक अमिट छाप छोड़ गया।

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