झारखंड राज्य ने पूरे किए 25 वर्ष, विकास और चुनौतियों की नई राह पर आगे बढ़ता युवा राज्यसंथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

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अनंत तिवारी

प्रबंध संपादक ; संथाल हूल एक्सप्रेस

झारखंड ने राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। साल 2000 में बिहार से अलग होकर अस्तित्व में आए इस नवोदित राज्य ने आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में कई उतार–चढ़ाव देखे, लेकिन आज यह राज्य नई उम्मीदों, नई संभावनाओं और विकास की दिशा में मजबूत कदमों के साथ आगे बढ़ रहा है।

राज्य की पहचान उसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, खनिज भंडार, पारंपरिक संस्कृति, जनजातीय अस्मिता और ऐतिहासिक संघर्षों से जुड़ी रही है। यहां की भूमि ने एक ओर बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, फूलो-झानो जैसे महान क्रांतिकारियों को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर आधुनिक राजनीतिक नेतृत्व ने इसे नए विकास मॉडल की ओर उभारने का प्रयास किया।

पिछले 25 वर्षों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई, उद्योग, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में आज भी विकास और अधिकारों से जुड़ी चुनौतियाँ मौजूद हैं, परंतु सरकारी योजनाओं और जनभागीदारी ने स्थिति को बदलने की दिशा में मजबूती दी है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने का काम लगातार जारी है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर इस समय राज्य को विकास की तेज रफ्तार देने की बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, खनन और उद्योगों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता लाने, तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।

राज्य के आर्थिक ढांचे में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला है। खनिज समृद्धि के बावजूद झारखंड लंबे समय तक विकास के आंकड़ों में पिछड़ता रहा, किंतु बीते दो दशकों में उद्योग, ऊर्जा और अवसंरचना क्षेत्र में नए निवेश सामने आए हैं। कृषि और वनाधारित अर्थव्यवस्था में भी सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार ने जल संरक्षण, पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ाने की दिशा में कई पहलें शुरू की हैं।

इतिहास बताता है कि अलग राज्य की मांग कोई दिनभर की प्रक्रिया नहीं थी। वर्ष 1922 में जयपाल सिंह मुंडा द्वारा आदिवासी महासभा का गठन, 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना, और लंबे राजनीतिक संघर्षों ने 15 नवंबर 2000 को नया राज्य बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। यह दिन राज्य की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक माना जाता है।

25 वर्ष पूरे होने के साथ झारखंड अब उस दौर में है जहाँ विकास की चुनौतियाँ और अवसर दोनों समान रूप से मौजूद हैं। एक ओर शिक्षा, स्वास्थ्य, संरचना और रोजगार के क्षेत्र में काम तेज़ करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक पहचान, पर्यावरण संतुलन और सामाजिक समावेशिता को भी प्राथमिकता देनी होगी।

राज्य के युवा वर्ग में उम्मीदें अधिक हैं। आने वाले वर्षों में झारखंड राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में अपनी मजबूत पहचान बनाने की क्षमता रखता है, बशर्ते शासन, जनता और प्रशासन तीनों मिलकर आगे बढ़ें। 25 साल का यह सफर नए झारखंड की नींव को मजबूत बनाने का संदेश देता है।

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