संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
भारत के महान संत, स्वतंत्रता सेनानी और अहिंसक सामाजिक क्रांति के अग्रदूत आचार्य विनोबा भावे की पुण्यतिथि पर आज पूरे देश में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। “भूदान आंदोलन” के प्रणेता विनोबा भावे ने अपने जीवन को समाज सुधार, समानता और मानवता की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया था।
आचार्य विनोबा भावे को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माना जाता है। गांधीवादी सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, त्याग, सेवा और साधना—का उन्होंने जीवनभर अनुपालन किया और इन्हीं सिद्धांतों को समाज में स्थापित करने का प्रयास किया।
साल 1951 में शुरू हुआ भूदान आंदोलन, भारतीय सामाजिक इतिहास की सबसे अनूठी और शांतिपूर्ण क्रांतियों में से एक रहा। विनोबा भावे ने अपना संपूर्ण जीवन गाँव-गाँव घूमकर लोगों से भूमिहीनों के लिए जमीन दान करने की अपील करते हुए बिता दिया। उनके इस आंदोलन के प्रभाव से लाखों एकड़ भूमि दान में मिली, जो समाज में समानता और न्याय की स्थापना की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हुई।
विनोबा भावे न केवल एक समाज सुधारक थे, बल्कि एक गहन चिंतक, लेखक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व भी थे। “गीता” का उनका विश्लेषण और ‘स्वदेशी,’ ‘सर्वोदय,’ ‘मानव एकता’ जैसे विचार आज भी प्रासंगिक हैं और मानव समाज के लिए दिशा-सूचक माने जाते हैं।
उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और ग्राम सभाओं द्वारा श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की जाती हैं। लोग उनके त्याग, सादगी और समाज सुधारक दृष्टिकोण को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराते हैं।
संथाल हूल एक्सप्रेस आचार्य विनोबा भावे को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनका जीवन-दृष्टिकोण, सेवा-भाव और मानवता के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।









