बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA की ऐतिहासिक जीत, नरेंद्र मोदी ने दी बधाई, विकास और सुशासन पर जोर

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पटना। बिहार में उस समय राजनीतिक धरती हिली जब National Democratic Alliance (एनडीए) ने विधानसभा चुनाव 2025 में 243 सदस्यीय सदन में 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाई, जिससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठबंधन अपने लगातार पांचवे कार्यकाल की ओर मज़बूती से अग्रसर है।

एनडीए की शानदार वापसी

मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा ने करीब 83 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि जदयू 77 सेटों पर आगे थी। एनडीए का कुल वोट-शेयर करीब 48% रहने का अनुमान है, जो पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों के आसपास का स्तर है। विपक्षी महागठबंधन को इस बार भारी चुनौती मिली, उसका वोट-शेयर लगभग 37% के करीब था।

पीएम मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा: “सुशासन की जीत हुई है। विकास की जीत हुई है। जनकल्याण की भावना की जीत हुई है। सामाजिक न्याय की जीत हुई है। बिहार के प्रत्येक नागरिक का हृदय से आभार।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत की सराहना की, जिन्होंने विपक्ष के प्रचार के बीच विकास एजेंडा जनता तक पहुँचाया।

विपक्ष का प्रदर्शन

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी)-नेता तेजस्वी यादव ने मतगणना से पहले दावा किया था कि उनकी पार्टी सरकार बनाएगी, लेकिन परिणामों ने उनकी दावेदारी को चुनौती दी। कांग्रेस समेत अन्य छोटे दलों का प्रदर्शन भी अपेक्षा से कम रहा।

सामाजिक समीकरण और सुझाव

विश्लेषकों के अनुसार, इस जीत में अति पिछड़ा वर्ग  और सामान्य वर्ग  का समर्थन अहम रहा। जमीनी स्तर पर ‘डबल-इंजन’ सरकार की छवि, सुशासन का वादा, और विकास-विकास की कल्पना ने वोटरों को प्रभावित किया।
कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं कि सामाजिक न्याय के मामलों — विशेषकर सवर्ण एवं सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए — अब एक नया फोकस होगा, ताकि इस वोट बैंक को कायम रखा जा सके।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया मिश्रित रही। कुछ लोगों ने जीत को अधिकारी रणनीति और विकास-दावों का परिणाम बताया, जबकि कुछ ने यह सवाल उठाया कि क्या यह केवल सुशासन का परिणाम है, या जातीय समीकरण, नेतृत्व-छवि तथा प्रचार-प्रवाह ने भी काम किया।

आगे की राह

इस जीत के साथ एनडीए ने बिहार में अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली है, लेकिन गठबंधन के भीतर संघ-सियासी संतुलन, नेतृत्व की भूमिका, एवं ज़मीन से जुड़ी शिकायतों का दबाव आने वाले दिनों में चुनौती बन सकता है—जैसे कि भाजपा और जदयू के बीच नेतृत्व को लेकर जटिलताएँ। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी के बीच आगे का तालमेल खास होगा।

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