दिल्ली ब्लास्ट में बड़ा खुलासा — डॉक्टर उमर नबी का प्लान था 6 दिसंबर को अयोध्या में बड़ा धमाका

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

नई दिल्ली, 13 नवम्बर :
दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए बम विस्फोट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों को उससे जुड़े चौंकाने वाले खुलासे हाथ लग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विस्फोटकों से लदी कार चलाने वाला डॉ. उमर नबी न केवल इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता था, बल्कि उसका अगला लक्ष्य अयोध्या था। वह 6 दिसंबर — बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी — के दिन देश को दहला देने वाला बड़ा धमाका करने की योजना बना रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, डॉ. उमर नबी (28 वर्ष) दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। वह पेशे से डॉक्टर था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संपर्क में था। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि उमर दिल्ली में हुए लाल किला विस्फोट में मारा गया, और डीएनए जांच से उसकी पहचान की पुष्टि हो चुकी है।

इस हमले में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हैं। जांच में पता चला है कि उमर फरीदाबाद, कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैले एक स्लीपर सेल नेटवर्क के संपर्क में था। यह नेटवर्क “फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल” के नाम से काम कर रहा था, जिसके तहत 8 सफेदपोश आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर और सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट तक शामिल हैं।

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि —

“डॉ. उमर के पास से मिले डिजिटल साक्ष्यों से स्पष्ट है कि वह 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन अयोध्या में एक श्रृंखलाबद्ध धमाके की योजना बना रहा था। दिल्ली का हमला उस बड़े प्लान का ‘ट्रायल रन’ था।”

सूत्रों ने बताया कि उमर ने विस्फोटकों को कश्मीर के पुलवामा से हरियाणा तक मेडिकल सप्लाई के नाम पर ट्रांसपोर्ट किया था। जांच एजेंसियों को उसके लैपटॉप, फोन और क्लाउड डेटा से कई एन्क्रिप्टेड संदेश और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन डिटेल्स मिली हैं, जो पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद हैंडलर्स से संपर्क की पुष्टि करती हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार, उमर अपने मेडिकल पेशे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को छिपाने के लिए करता था। उसने कथित रूप से अस्पतालों और क्लिनिकों के जरिए फंडिंग और विस्फोटक सामग्री की खरीदारी को छिपाने का जाल तैयार किया था।

फरीदाबाद से गिरफ्तार अन्य आरोपियों से पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि उमर के साथ कई युवा डॉक्टरों और इंजीनियरों का ऑनलाइन नेटवर्क सक्रिय था, जो भारत के विभिन्न शहरों में छोटे-छोटे मॉड्यूल के रूप में काम करते थे। यह नेटवर्क “मेडिको ब्रदरहुड” नामक एक गुप्त चैट ग्रुप के माध्यम से संवाद करता था।

एनआईए, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और आईबी की संयुक्त टीम इस नेटवर्क की विदेशी फंडिंग और तकनीकी सहयोग की भी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि उमर की टीम का संपर्क दुबई और कराची स्थित जैश हैंडलर्स से था।

इस पूरे मामले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ खड़ी कर दी हैं। शिक्षित तबके से जुड़े लोगों का इस तरह आतंकी गतिविधियों में शामिल होना देश के लिए एक खतरनाक संकेत है। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे “डॉक्टर टेरर नेटवर्क” का नाम दिया है और देशभर में इससे जुड़े लोगों की धरपकड़ शुरू कर दी गई है।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा —

“हम इस मॉड्यूल के हर सदस्य तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉ. उमर की योजना यदि सफल होती, तो 6 दिसंबर को देश को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था। हमारी एजेंसियों ने समय रहते इस आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया।”

फिलहाल, गिरफ्तार सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।

यह मामला न केवल दिल्ली धमाके की साजिश का पर्दाफाश कर रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि आतंक अब किताबों और क्लिनिकों की आड़ में पल रहा है।


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