संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
नई दिल्ली, 13 नवम्बर :
हाल ही में दिल्ली को दहलाने वाले बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक 12 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है — जिनमें से 6 पेशे से डॉक्टर बताए जा रहे हैं। यह खुलासा न केवल जांच एजेंसियों बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि यह आतंकी नेटवर्क के शिक्षित वर्ग तक फैलने का संकेत देता है।
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों में से अधिकांश का संबंध दिल्ली, अलीगढ़, लखनऊ, और पटना के मेडिकल कॉलेजों से रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये सभी लंबे समय से एक स्लीपर सेल नेटवर्क के संपर्क में थे और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी संगठनों से प्रेरित हुए थे। कुछ ने कथित रूप से मानवाधिकार व सामाजिक सेवा के बहाने फंडिंग और कम्युनिकेशन चैनल तैयार किए थे।
जांच एजेंसियों ने यह भी बताया कि इन डॉक्टरों का काम आतंकियों को चिकित्सीय सहायता, नकली मेडिकल रिपोर्ट तैयार करना और फंड के लेन-देन को वैध दिखाना था। वहीं, कुछ ने अपने क्लिनिकों का इस्तेमाल गुप्त मीटिंग्स और एन्क्रिप्टेड डिवाइस ट्रांसफर के लिए किया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“दिल्ली धमाके के पीछे सिर्फ स्थानीय मॉड्यूल नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय था। डॉक्टरों की गिरफ्तारी से साफ है कि आतंकी संगठन अब शिक्षित तबके को भी अपने मिशन में शामिल कर रहे हैं, जिससे वे प्रशासन की निगाहों से बच सकें।”
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव, एन्क्रिप्टेड चैट्स, फर्जी दस्तावेज और विदेशी खातों से फंड ट्रांसफर के सबूत मिले हैं। फॉरेंसिक टीम इन सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस खुलासे ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। पहले जहां आतंकी गतिविधियों में बेरोजगार युवाओं या असंगठित वर्गों की संलिप्तता सामने आती थी, वहीं अब शिक्षित और पेशेवर वर्ग के लोग भी कट्टरपंथ की गिरफ्त में आ रहे हैं।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। एनआईए ने इस मॉड्यूल को “मेडिको-टेरर नेटवर्क” का नाम दिया है और इसकी कड़ियाँ विदेशों तक जुड़ी होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल सभी आरोपियों को गहन पूछताछ के लिए रिमांड पर भेजा गया है, और उनके बैंक खातों, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स व कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है।
यह मामला न केवल दिल्ली धमाके की साजिश का खुलासा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आतंक का चेहरा अब बदल चुका है — जो किताबें और स्टेथोस्कोप उठाने वाले भी बम और विचारधारा की भाषा बोलने लगे हैं।









