भक्ति और समाज सुधार के प्रतीक : श्री कनकदास जयंती पर विशेष

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संथाल हूल एक्सप्रेस टीम

भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक और भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त श्री कनकदास जी की जयंती आज श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाई जा रही है। समाज में समानता, मानवता और आध्यात्मिक प्रेम का संदेश देने वाले कनकदास जी ने अपने जीवनभर सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया तथा भक्ति मार्ग को जन-जन तक पहुँचाया।

ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार श्री कनकदास का जन्म कर्नाटक प्रदेश में हुआ था। वे दास परंपरा के महान संत और कवि के रूप में प्रसिद्ध रहे। उनकी रचनाओं ने जहाँ समाज को अध्यात्म की राह दिखाई, वहीं जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर ईश्वर प्रेम को ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया।

कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा और भक्ति के कारण उन्हें अनेक चमत्कारों की प्राप्ति हुई। उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर से संबंधित “कनकन किंडी” (वह झरोखा जिसके माध्यम से दर्शन का सौभाग्य मिला) की कथा आज भी भक्तों के हृदय में आस्था जगाती है।

कनकदास ने कन्नड़ भाषा में कई अमर भक्ति गीत और साहित्य की रचना की, जो आज भी भक्ति संगीत की धरोहर हैं। उनका संदेश था—
“ईश्वर सबका है, किसी एक का नहीं”

इस अवसर पर संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक) परिवार ने संत कनकदास जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सभी को उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेने की अपील की है।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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