वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर थाना परिसर में हुआ भव्य आयोजन

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संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता

हजारीबाग : आजादी के अमर प्रतीक राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दारू और मुफ्फसिल थाना परिसर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर समारोह का शुभारंभ दारू थाना प्रभारी ईकबाल हुसैन और मुफ्फसिल थाना प्रभारी रौशन कुमार वर्णवाल के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में थाना परिसर देशभक्ति के रंग में रंग उठा, जब पुलिसकर्मियों ने एक स्वर में वंदे मातरम का गायन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुई। पूरे वातावरण में देशभक्ति की भावना गूंज उठी। थाना प्रभारी ईकबाल हुसैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह गीत हमें अपने कर्तव्यों, देशभक्ति और समाज सेवा के प्रति प्रेरित करता है। मुफ्फसिल थाना प्रभारी रौशन कुमार वर्णवाल ने कहा कि इस वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम की भावना से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अगले एक वर्ष तक प्रत्येक माह वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विविध सांस्कृतिक और जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्कूलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने बताया कि 1875 में लिखे गए वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को एकता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे देश की एकता, अखंडता और शांति के लिए सदैव कार्य करेंगे। कार्यक्रम के अंत में थाना प्रभारी ईकबाल हुसैन और मुफ्फसिल थाना प्रभारी रौशन कुमार वर्णवाल ने उपस्थित सभी पुलिसकर्मियों और नागरिकों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि इस एक वर्ष तक चलने वाले समारोह का उद्देश्य समाज में राष्ट्रीय एकता, भाईचारा और देशभक्ति की भावना को सशक्त बनाना है। इस तरह दारू थाना परिसर में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक क्षण बना, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायी संदेश छोड़ गया हम सब भारत मां के सपूत हैं, और उसका सम्मान हमारा परम धर्म है।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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