संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।
सिख धर्म के संस्थापक और विश्व को सत्य, प्रेम एवं सद्भाव का मार्ग दिखाने वाले गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व पूरे देश और दुनिया में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। दीपावली के लगभग 15 दिन बाद आने वाली कार्तिक पूर्णिमा तिथि को यह पावन पर्व मनाए जाने की परंपरा है।
गुरु नानक देव जी ने जाति, धर्म और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की एकता का संदेश दिया। उनका जीवन सदैव “नाम जपो, किरत करो और वंड छको” की शिक्षा से प्रेरित रहा, जिसका अर्थ है—ईश्वर का स्मरण, ईमानदारी से कार्य और कमाई को दूसरों के साथ बाँटना।
उनकी वाणी का संकलन ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में मिलता है, जो विश्वभर में करोड़ों लोगों को जीवन का सच्चा मार्ग दिखाती है।
इस अवसर पर गुरुद्वारों में भजन-कीर्तन, अखंड पाठ और प्रभात फेरियां आयोजित की जाती हैं। लंगर सेवा में सभी जाति और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं, जो समानता और भाईचारे का संदेश देता है।
झारखंड के विभिन्न जिलों में भी श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ प्रकाश उत्सव मना रहे हैं। सिख समुदाय सहित अन्य धर्मों के लोग भी गुरु नानक जी के उपदेशों को आत्मसात करते हुए समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प ले रहे हैं।
गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ आज भी हमारे लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं। वे हमें इंसानियत का महत्व समझाते हैं और एक-दूसरे के प्रति प्रेम व सहयोग की भावना विकसित करने की प्रेरणा देते हैं।
संथाल हूल एक्सप्रेस परिवार की ओर से सभी श्रद्धालुओं को गुरु नानक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
ईश्वर करे, गुरु साहिब की कृपा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक), झारखंड
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