संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क।
कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को पूरे देश में देव दीपावली का भव्य आयोजन किया जा रहा है। दीपों का यह त्योहार भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर नामक दैत्य पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर उतरकर दीप प्रज्वलित करते हैं और प्रकाश पर्व का उत्सव मनाते हैं। इसी कारण इसे ‘देवों की दीवाली’ के नाम से जाना जाता है।
वाराणसी में गंगा तटों की अद्भुत भव्यता
काशी में देव दीपावली का स्वरूप हमेशा से पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करता रहा है। गंगा घाटों पर लाखों दीये जलाकर श्रद्धालुओं द्वारा अद्भुत नजारा प्रस्तुत किया जाता है। गंगा आरती, धार्मिक अनुष्ठान और आतिशबाजी से पूरा शहर दैवीय प्रकाश से नहाया हुआ प्रतीत होता है।
झारखंड में भी उमंग-उत्साह
झारखंड के विभिन्न जिलों में भी इस पावन पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों, घरों और घाटों पर दीपक जलाकर परिवारों द्वारा सुख-समृद्धि की कामना की जा रही है।
धार्मिक संस्थाओं और समितियों द्वारा दीपदान, भजन-कीर्तन और सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुबह पवित्र नदियों एवं तालाबों में स्नान कर लोग पूजा-अर्चना में जुटे हैं।
सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व
इस दिन गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के रूप में भी बड़े जोश और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन दरबार, नगर कीर्तन और लंगर का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर श्रद्धालु गुरुमंत्र और सेवा भाव से अपने जीवन को धन्य मानते हैं।
अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव दीपावली अज्ञान, अन्याय और अधर्म के अंधकार पर ज्ञान, सत्य और धर्म के प्रकाश की विजय का प्रतीक है। यह पर्व समाज में आपसी एकता, श्रद्धा और खुशहाली का संदेश देता है।
प्रकाश और आस्था से भरे इस दिव्य पर्व की चकाचौंध में सभी के जीवन में उजाला, समृद्धि और शांति का प्रसार हो—इसी मंगल कामना के साथ…
संथाल हूल एक्सप्रेस (हिंदी दैनिक), झारखंड








