संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
रांची, 05 नवंबर। झारखंड के एक गांव में हुए सामूहिक हमले में एक गर्भवती महिला के पेट में पल रही चार महीने की अजन्मी बच्ची की मौत हो गई है। इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता पर परिवार ने सवाल उठाए हैं।
झारखंड प्रदेश पाहन महा संघ द्वारा मंगलवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में पीड़िता पूनम देवी (पत्नी, सतीश पाहन) ने बताया कि 27 अक्टूबर को ‘स्वशासन पड़हा सरकार’ के सुभाष खलखो के नेतृत्व में सैकड़ों लोग उनके धान के खेत पर पहुंचे। परिवार द्वारा धान काटने से मना करने पर भीड़ ने सतीश पाहन और पूनम देवी को रस्सी से बांधकर लात-घूंसों से मारपीट की। इस हमले के दौरान पूनम देवी के पेट में चोट लगने से उनकी अजन्मी बच्ची की मौत हो गई।
परिवार ने आरोप लगाया कि इसकी शिकायत बुडमु थाना में की गई, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। पाहन संघ के अध्यक्ष जगदीश पाहन ने ‘पड़हा सरकार’ नामक संगठन को असंवैधानिक बताते हुए आरोप लगाया कि यह संगठन आदिवासी व्यवस्था को मिटाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 8 नवंबर को इस संगठन द्वारा बुलाई गई ‘जन अदालत’ पर रोक नहीं लगी, तो 20,000 से अधिक आदिवासी एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
संवाददाता सम्मेलन में यह भी आरोप लगाया गया कि पड़हा सरकार के लोगों ने पारंपरिक पदों जैसे महतो और कोटवार की जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया है और अब पाहन की जमीन को निशाने पर लिया जा रहा है। साथ ही, परिवार ने बताया कि 2024 में भी उनकी धान की फसल को जला दिया गया था, लेकिन उस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पाहन संघ ने प्रशासन से ऐसे संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।









