संथाल हुल एक्सप्रेस नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उसके लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले के बाद अब आयोग अपने कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों के अनुरूप कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन संरचना की समीक्षा करेगा।
क्या है ToR (टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस)?
ToR वह आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि वेतन आयोग को किन-किन मुद्दों पर अध्ययन और सिफारिश करनी है। इसमें आयोग की कार्यसीमा, प्राथमिकताएँ, और रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा तय होती है।
किन बिंदुओं पर होगा अध्ययन?
सूत्रों के मुताबिक आयोग निम्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार करेगा—
वर्तमान वेतन संरचना कितनी उचित और व्यावहारिक है?
महंगाई तथा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप किस स्तर पर संशोधन आवश्यक है?
आगामी वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों को कितना वेतन एवं पेंशन मिलना चाहिए?
कार्यक्षमता और कर्मचारी कल्याण से जुड़े अन्य सुधार।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई सिफारिशें लागू होने पर उनकी आय में बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार द्वारा अनुमोदन के उपरांत ही बदलाव लागू होंगे।
सरकार का मानना है कि विकसित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर भारत में सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा और क्रयशक्ति बनाए रखना आवश्यक है।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की आगामी बैठकों और संभावित सिफारिशों पर टिकी हुई हैं।









