संथाल हुल एक्सप्रेस नई दिल्ली।
भारत में रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के सेवा क्षेत्र ने बीते 6 वर्षों में कुल 4 करोड़ नए रोजगार उपलब्ध कराए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि रोजगार सृजन में भी मुख्य भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र वर्तमान में देश की 18.8 करोड़ से अधिक जनशक्ति को कार्य प्रदान कर रहा है, जो देश की कुल कार्यबल का लगभग 30 प्रतिशत है।
🔶 सुधारों के बिना घट सकती है क्षमता — नीति आयोग का चेतावनी संकेत
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि यदि संरचनात्मक सुधार समय रहते नहीं किए गए, तो सेवा क्षेत्र की रोजगार सृजन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि—
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की तेज़ी
- तकनीकी उन्नयन
- विदेशी निवेश में वृद्धि
- स्टार्टअप संस्कृति का विकास
इन तत्वों ने नए अवसरों को जन्म दिया है, लेकिन इन्हें लंबे समय तक बनाए रखने के लिए नीतिगत मजबूती आवश्यक है।
🔶 चार स्तंभों पर आधारित रोडमैप तैयार
थिंक-टैंक ने सुधारों हेतु एक चार-स्तंभीय रोडमैप भी तैयार किया है, जिसमें शामिल हैं —
1️⃣ कौशल विकास एवं प्रशिक्षण
2️⃣ उद्यमशीलता और MSME प्रोत्साहन
3️⃣ श्रम नीतियों में लचीलापन
4️⃣ तकनीकी नवाचार को बढ़ावा
🔶 वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सेवा क्षेत्र अहम
भारत की GDP में लगभग 55% हिस्सेदारी रखने वाला सेवा क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि की प्रमुख धुरी माना जाता है। विशेषकर —
- आईटी एवं आईटीईएस
- पर्यटन एवं होटल उद्योग
- ई-कॉमर्स
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा
इन क्षेत्रों में उछाल ने रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में रोजगार वृद्धि की संभावनाएँ मजबूत हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि —
➡ यदि सुधारों की प्रक्रिया तेज़ न की गई,
➡ और कौशल विकास पर पर्याप्त निवेश न बढ़ाया गया,
तो भविष्य में यह गति धीमी भी पड़ सकती है।
फिलहाल यह रिपोर्ट भारत के रोजगार परिदृश्य में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।









