6 वर्ष बाद ट्रंप और जिनपिंग होंगे आमने-सामने, APEC समिट पर टिकी विश्व की निगाहें

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संथाल हूल एक्सप्रेस सेंट्रल डेस्क

बुसान/वॉशिंगटन/बीजिंग।
अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में नई दिशा मिलने की संभावना तब जगी है, जब दोनों देशों के शीर्ष नेता—पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग—6 वर्ष बाद एक-दूसरे से प्रत्यक्ष मुलाकात करने जा रहे हैं। यह अहम बैठक दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित APEC शिखर सम्मेलन के इतर होगी।

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझ रही है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषक इस मुलाकात को अत्यंत महत्वपूर्ण बता रहे हैं।


🔶 रणनीतिक मुद्दों पर होगी चर्चा

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार इस बैठक में निम्न विषयों पर खास तौर पर वार्ता होने की संभावना है—

  • व्यापारिक तनाव और प्रतिबंधों में कमी
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन
  • दक्षिण चीन सागर और ताइवान विवाद
  • वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता
  • तकनीक एवं साइबर सुरक्षा से जुड़े मुद्दे

🔶 महाशक्ति बनने की दौड़

विशेषज्ञों का मत है कि—
➡ चीन विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
➡ वहीं, अमेरिका अपनी पारंपरिक वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए कई मोर्चों पर सक्रिय है।

यही कारण है कि दोनों देशों के बीच यह संवाद आगे की वैश्विक शक्ति-समीकरण को प्रभावित कर सकता है।


🔶 संभावनाओं और आशंकाओं के बीच मुलाकात

🔸 यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक व्यापार बाजारों को राहत मिल सकती है।
🔸 वहीं, असफलता की स्थिति में तनाव और बढ़ने की आशंका विशेषज्ञ जता रहे हैं।

कूटनीतिक जगत में यह मुलाकात एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखी जा रही है। अमेरिका और चीन के बीच वार्ता न केवल दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि विश्व शांति, आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा व्यवस्था के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।

दुनियाभर की नजरें अब इस अहम बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।

Bishwjit Tiwari
Author: Bishwjit Tiwari

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