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बरहेट। प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को ईद-उल-फ़ितर का पावन त्योहार अदब, एहतेराम और रूहानी माहौल में मनाया गया। क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में तय समय पर ईद की नमाज अदा की गई। हालांकि शुक्रवार देर रात हुई बेमौसम बारिश के कारण इस बार ईदगाह में सामूहिक नमाज अदा नहीं हो सकी, जिससे लोगों में मायूसी देखी गई।

बारिश के चलते लोगों को मस्जिदों में ही नमाज पढ़नी पड़ी। सनमनी मस्जिद में सुबह 9 बजे, जबकि अन्य मस्जिदों में कहीं 8 बजे तो कहीं 7:30 बजे नमाज अदा की गई।
इमाम ने तकवा, सब्र और नेकअखलाक पर दिया जोर
सनमनी मस्जिद के इमाम मो. शमीम इस्लाही ने नमाज के बाद खुतबा देते हुए कहा कि सिर्फ रमज़ान के रोजे रखना ही काफी नहीं है, बल्कि रोजे का असली मकसद इंसान के अंदर तकवा, सब्र और नेक अखलाक पैदा करना है।
उन्होंने कहा कि रोजा इंसान को बुराइयों से दूर रहने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने तथा अपने गुनाहों से तौबा करने की सीख देता है। उन्होंने अपील की कि ईद के मौके पर आपसी भाईचारे को मजबूत करें, एक-दूसरे की मदद करें और समाज में अमन-चैन कायम रखने का संकल्प लें।
इमाम ने यह भी कहा कि ईद की खुशी तभी पूरी होती है जब हम गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों को इस खुशी में शामिल करें।

अंत में देश व समाज की शांति, तरक्की और भाईचारे के लिए दुआ की गई।
ईदगाह में नमाज न होने से फीकी रही रौनक
मौसम खराब रहने के कारण ईदगाह में नमाज नहीं हो सकी, जिससे इस बार ईद की रौनक कुछ कम नजर आई। सामान्य दिनों की तुलना में चहल-पहल भी कम रही।
ग्रामवासियों—मो. मुमताज़ अंसारी, महफूज अंसारी, मो. अबसर, अरशद अंसारी, अजीमुद्दीन अंसारी और सद्दाम हुसैन—ने बताया कि हर साल ईदगाह में सामूहिक नमाज अदा करने का उत्साह अलग ही होता है, लेकिन इस बार ईदगाह में नमाज न होने से लोग थोड़ा उदास हैं।
भाईचारे का संदेश ईद के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी, मिठास बाँटी और आपसी सौहार्द व भाईचारे का संदेश फैलाया।








