बरहेट। मारवाड़ी समाज का प्रमुख पारंपरिक पर्व गणगौर महोत्सव शनिवार को तालाबों में प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ पूर्ण आस्था और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। होली दहन के अगले दिन से शुरू होने वाला यह 16-दिवसीय पर्व कुंवारी लड़कियों और नवविवाहिताओं द्वारा ईशर-गौरा (शिव-पार्वती) की पूजा के लिए जाना जाता है।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के पूर्व प्रांत संयोजक दीपक डोकानिया ने बताया कि महिलाओं ने शनिवार को राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में पूरे विधि-विधान से गणगौर की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद मिठाई, फल, हलवा, पूड़ी और गेहूं का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद उद्यापन की रस्में पूरी की गईं।

शाम होते ही महिलाएं लोकगीतों और नृत्य के साथ गणगौर की प्रतिमा लेकर तालाब पहुंचीं, जहां विधिवत जल अर्पण के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।
नवविवाहिताओं में दिखा खास जोश
पहली बार गणगौर मनाने वाली नवविवाहिताओं में विशेष उत्साह नजर आया।
प्रिया ईशान डोकानिया ने बताया कि उनकी शादी पिछले वर्ष नवंबर में हुई थी और यह उनका पहला गणगौर है, जिसके लिए वह बेहद उत्साहित थीं।
वहीं वर्षा राम काबरा ने कहा कि यह पर्व उनके जीवन में कई खुशियां लेकर आया है और पूरे 16 दिनों की पूजा विशेष रही। गणगौर का यह पारंपरिक आयोजन स्थानीय मारवाड़ी समाज में एकता, सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक बना रहा।
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