संथाल हूल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
वृंदावन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में वर्षों से चली आ रही एक पवित्र परंपरा उस समय टूट गई, जब ठाकुर जी का भोग समय पर नहीं लगाया जा सका। जानकारी के अनुसार, मंदिर में कार्यरत हलवाई को कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण पहली बार ठाकुर जी का बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं हो पाया। इस घटना से श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े सेवायतों में गहरा आक्रोश और चिंता देखने को मिल रही है।
मंदिर सूत्रों के मुताबिक, ठाकुर जी के भोग की व्यवस्था लंबे समय से निर्धारित परंपराओं और नियमों के अनुसार होती रही है। लेकिन वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी से हलवाई ने भोग बनाने में असमर्थता जता दी। इसके चलते न केवल धार्मिक व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंची है।
इस मामले को लेकर मंदिर के गोस्वामियों और सेवायतों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी का वेतन विवाद नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा गंभीर विषय है। वहीं, मंदिर प्रबंधन और हाई पावर कमेटी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाई पावर कमेटी का गठन किया गया था, जिसके अंतर्गत करीब 80 हजार रुपये मासिक वेतन पर हलवाई की नियुक्ति की गई थी।
आरोप है कि बावजूद इसके, संबंधित कर्मचारी को समय पर वेतन नहीं दिया गया, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। मामले के सामने आने के बाद हाई पावर कमेटी अपनी जिम्मेदारी से बचती नजर आ रही है और स्थिति स्पष्ट करने से कतरा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो भविष्य में मंदिर की अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल यह मामला वृंदावन सहित देशभर के भक्तों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों ने मांग की है कि मंदिर प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर वेतन भुगतान सुनिश्चित करे, ताकि ठाकुर जी की सेवा-पूजा और सदियों पुरानी परंपराएं बाधित न हों।









