भारतीय क्रिकेट में रेड बॉल और व्हाइट बॉल के लिए अलग-अलग कोच की बहस एक बार फिर सुलग उठी है। हाल ही में आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के एक को-ऑनर द्वारा टेस्ट टीम के लिए अलग कोच नियुक्त करने का सुझाव दिए जाने के बाद क्रिकेट जगत में प्रतिक्रिया तेज हो गई। इसी कड़ी में पूर्व भारतीय खिलाड़ी और अनुभवी क्रिकेट व्यक्तित्व ने फ्रेंचाइज़ी ओनर की इस टिप्पणी पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि जिन्हें क्रिकेट की गहराई और अंतर समझ नहीं है, उन्हें टीम चयन और कोचिंग संरचना पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “टेस्ट सीरीज़ में हार के बाद जिनका क्रिकेट से कोई संबंध नहीं, वे भी प्रतिक्रिया देने लगे हैं। हर किसी को अपने क्षेत्र में रहना चाहिए और बिना समझे दूसरों के काम में दखल नहीं देना चाहिए।” बयान साफ दर्शाता है कि पूर्व खिलाड़ी आईपीएल फ्रेंचाइज़ी प्रबंधन द्वारा राष्ट्रीय टीम की आंतरिक संरचना पर सवाल उठाने से सहमत नहीं हैं।
बात शुरू हुई जब दिल्ली की फ्रेंचाइज़ी के एक को-ओनर ने टेस्ट क्रिकेट के लिए अलग कोच नियुक्त किए जाने की मांग की। उनका मानना था कि रेड बॉल क्रिकेट की तकनीक, प्रशिक्षण और रणनीति अलग होती है, इसलिए एक विशेषज्ञ कोच अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। हालांकि इस बयान को लेकर खेल विशेषज्ञ और पूर्व खिलाड़ी दो मतों में बंटे दिखाई दे रहे हैं।
एक तरफ कुछ क्रिकेट प्रेमी और विश्लेषक इसे सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम मानते हैं, वहीं अनुभवी खिलाड़ी का तर्क है कि कोचिंग और चयन का निर्णय क्रिकेट की विशेषज्ञ कमेटी और बोर्ड पर छोड़ देना चाहिए। उनका कहना है कि फ्रेंचाइज़ी स्तर की राय राष्ट्रीय टीम पर थोपना उचित नहीं।
यह बहस ऐसे समय में उठी है जब भारतीय टीम हालिया टेस्ट प्रदर्शन को लेकर समीक्षा के दौर में है। आने वाले दिनों में बोर्ड इस मामले पर क्या रुख अपनाता है, यह क्रिकेट जगत की निगाहों में बना रहेगा। इतना तय है कि रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के लिए अलग कोच की नीति अभी भी चर्चा और मतभेदों के बीच खड़ी है।










