कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम दर्ज होने को लेकर नई कानूनी चुनौती सामने आई है। एक याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली के राजस्व न्यायालय में दायर मामले में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में प्राप्त हुई।
याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने इस मामले में स्पष्टीकरण मांगते हुए आरोप लगाया कि नागरिकता प्राप्ति से तीन वर्ष पूर्व ही नाम मतदाता सूची में शामिल कैसे किया गया। इसके पीछे दस्तावेज़ संबंधी त्रुटि या किसी स्तर पर लापरवाही होने की आशंका व्यक्त की गई है।
गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर सितंबर माह में न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस प्रकार के ऐतिहासिक मामलों की प्रत्यक्ष जांच करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बावजूद याचिका पर आगे सुनवाई की मांग जारी है।
अब अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि मामले में जांच या तफ्तीश की सीमा क्या होगी और क्या आगे कोई औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है। मामला राजनीतिक एवं कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा में बना हुआ है।









