संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क। अंतरराष्ट्रीय डेस्क।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध सामान्य करने की कवायद एक बार फिर असफल साबित हुई है। सऊदी अरब की मध्यस्थता में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई तीसरी बैठक भी बेनतीजा रही। बैठक का उद्देश्य तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति बनाना था, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।
सूत्रों के अनुसार डेढ़ माह में यह तीसरी वार्ता थी, लेकिन तीनों दौर में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे पहले तुर्की की मेजबानी में इस्तांबुल में भी दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मिले थे। वहां सीमा पर सीजफायर को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन TTP के मुद्दे पर फैसला लंबित ही रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान शासित अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह TTP ही है। पाकिस्तान TTP को आतंकवादी संगठन मानता है और उस पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे आंतरिक मामला बताकर हर बार वार्ता को आगे बढ़ाने की बात कहता है।
राजनयिक मानते हैं कि हालिया वार्ता का विफल होना दोनों देशों के संबंधों में और तनाव बढ़ा सकता है।









