संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क। इस्लामाबाद।
पाकिस्तान में हाल ही में किए गए संवैधानिक संशोधन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस संशोधन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह संशोधन देश की न्यायपालिका के अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित करने के आरोपों के कारण विवादों में है।
रिपोर्ट के अनुसार नए संशोधन द्वारा देश की सैन्य व्यवस्था को अधिक शक्तिशाली बनाया गया है, जबकि न्यायपालिका के अधिकारों में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह परिवर्तन न्यायिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन (UNHRA) के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि यह 27वां संशोधन पाकिस्तान में कानूनी व्यवस्था और संस्थागत संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि यदि न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमज़ोर होती है तो इसका सीधा असर देश में कानून-व्यवस्था, मानवाधिकार और प्रशासनिक पारदर्शिता पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह संशोधन आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीतिक और कानूनी स्थिति को और जटिल बना सकता है। वहीं, इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संयुक्त राष्ट्र की यह टिप्पणी पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता का संकेत मानी जा रही है।









