संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
छत्तीसगढ़। सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान मारे गए एक करोड़ के इनामी नक्सली हिडमा को लेकर कई अहम जानकारी सामने आई हैं। माओवादी संगठन में ‘लाल आतंकी’ के नाम से कुख्यात हिडमा देश के सबसे खतरनाक और रणनीतिक नक्सली कमांडरों में गिना जाता था। उसके मारे जाने की खबर के साथ उसकी दूसरी पत्नी रज्जे की मौत की भी पुष्टि हुई है।
हिडमा का जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुआ था। संगठन में वह CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सबसे कम उम्र के सदस्यों में शामिल था। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर–1 का प्रमुख कमांडर था और माओवादी हमलों का मास्टर रणनीतिकार माना जाता था।
उसकी पहचान मुख्य रूप से 2013 के झीरम घाटी नरसंहार से जुड़ी है, जिसमें कांग्रेस नेताओं समेत 27 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा वह दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े हमलों की योजना में शामिल रहा, जिनमें सैकड़ों जवान शहीद हुए।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हिडमा न केवल हमलों का मास्टरमाइंड था, बल्कि वह संगठन की गतिविधियों को छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रूप से संचालित करता था। उसकी रणनीति और छिपने की क्षमता की वजह से वह वर्षों तक पुलिस और सुरक्षा बलों की पकड़ से दूर रहा।
हिडमा के मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलियों के लिए बड़ा झटका बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उसके खात्मे से माओवादियों की दक्षिण बस्तर में पकड़ कमजोर पड़ सकती है, हालांकि संगठन के रीग्रुप होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा बल सतर्क हैं।








