संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
ढाका/जिनेवा। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सज़ा सुनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ट्रिब्यूनल की कार्यवाही को न तो निष्पक्ष और न ही अंतरराष्ट्रीय न्याय मानकों के अनुरूप बताया। संस्था का कहना है कि जिस प्रक्रिया के तहत सज़ा सुनाई गई है, वह पारदर्शिता और मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों पर खरी नहीं उतरती।
उधर, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने भी निष्पक्ष सुनवाई, तय न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकार मानकों पर ज़ोर देते हुए फांसी की सज़ा के निर्णय का विरोध किया है। एजेंसी का कहना है कि किसी भी मामले में मौत की सज़ा तभी उचित मानी जा सकती है जब प्रक्रिया पूरी तरह न्यायसंगत, निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का यह विरोध ऐसे समय में आया है, जब बांग्लादेश के कई हिस्सों में इस फैसले को लेकर तनाव और विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती कर दी है।
मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में ट्रिब्यूनल की कार्यवाही की समीक्षा करे और न्याय के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करे।









